न्यूयॉर्क : विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता होने से दोनों देशों के संबंधों को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, उन्होंने कहा कि समझौते को लेकर तेजी से प्रगति की उम्मीद के बावजूद वार्ता की जमीनी हकीकत कहीं अधिक जटिल रही है। जयशंकर ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के उच्चस्तरीय सप्ताह के समापन पर एशिया सोसाइटी के विशेष संवाद में यह बात कही।
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में छोटे उत्पादकों और किसानों के हितों को ध्यान में रखने की जरूरत पर जोर देते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत की उत्पादन और सामाजिक संरचना अमेरिका से काफी अलग है। दोनों देशों के बीच प्रति व्यक्ति आय का अंतर भी बड़ा है। इसलिए वार्ता में धैर्य और बारीकियों पर ध्यान जरूरी है। उन्होंने कहा कि अब व्यापार समझौते को लेकर दोनों पक्षों में मोटे तौर पर समझ बनी हुई है।
भारत और अमेरिका ने फरवरी 2026 में द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण के लिए रूपरेखा को अंतिम रूप देने की घोषणा की थी। इसके बाद अमेरिकी शुल्क व्यवस्था में बदलाव और नई व्यापार जांचों के चलते बातचीत जारी रही है। जयशंकर ने कहा कि अमेरिकी व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत चल रही प्रक्रिया यह तय करने में महत्वपूर्ण होगी कि समझौते को किस बिंदु पर अंतिम रूप दिया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि द्विपक्षीय संबंधों पर अमेरिका के आंतरिक घटनाक्रमों का प्रभाव पड़ा है। उनके मुताबिक आज विदेश नीति केवल सरकारों और राजनयिकों तक सीमित नहीं है और सोशल मीडिया के दौर में जनमत भी महत्वपूर्ण कारक बन गया है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल 29 सितंबर से 5 अक्टूबर तक अमेरिका की यात्रा पर हैं। वह मिल्वॉकी में जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने के साथ अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर से द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत करेंगे। भारत-अमेरिका के बीच अभी कोई व्यापक द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौता लागू नहीं है और दोनों देश मौजूदा वार्ता के जरिए व्यापार संबंधों के लिए नया ढांचा तैयार करने पर काम कर रहे हैं।