भारत अब पॉपकॉर्न का आयात नहीं, निर्यात करेगा  
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भारत अब पॉपकॉर्न का आयात नहीं, निर्यात करेगा

उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने एलुरु में देश के पहले नॉन-जीएमओ हाई-एक्सपेंशन पॉपकॉर्न मक्का हाइब्रिड बीज का शुभारंभ किया, कहा अब भारत आयातक नहीं बल्कि वैश्विक निर्यातक बनने की दिशा में अग्रसर

Goutam Ojha

एलुरु : उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने सोमवार को कृषि में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी, नवाचार और स्वदेशी बीज विकास पर जोर दिया। आंध्र प्रदेश के एलुरु जिले के मुसुनुरु में उन्होंने Gourmet Popcornica द्वारा विकसित भारत के पहले नॉन-जीएमओ हाई-एक्सपेंशन पॉपकॉर्न मक्का हाइब्रिड बीज का शुभारंभ किया।

राधाकृष्णन ने इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि भारत को पॉपकॉर्न के लिए आयात पर निर्भर रहने के बजाय वैश्विक बाजार में निर्यातक बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों, वैज्ञानिकों और उद्यमियों के प्रयासों से विकसित बेहतर बीज कृषि क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।

उपराष्ट्रपति ने Gourmet Popcornica के कारखाने और कोल्ड स्टोरेज सुविधा का भी दौरा किया। उन्हें मक्का प्रसंस्करण, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग और भंडारण की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में आंध्र प्रदेश के राज्यपाल एस. अब्दुल नजीर और मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू भी मौजूद रहे।

40 हजार एकड़ में 17,500 किसान कर रहे खेती

मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि स्वदेशी नॉन-जीएमओ हाइब्रिड मक्का की खेती 40,000 एकड़ क्षेत्र में 17,500 किसानों के साथ की जा रही है। नुजवीड के पास मुसुनुरु में देश का सबसे बड़ा पॉपकॉर्न प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किया गया है।

नायडू के मुताबिक, Gourmet Popcornica की देश के पॉपकॉर्न उत्पादन में करीब 70 फीसदी हिस्सेदारी है। उन्होंने कहा कि भारत लंबे समय से पॉपकॉर्न के लिए ब्राजील जैसे देशों से आयात पर निर्भर रहा है, लेकिन अब भारतीय उत्पादन को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की जरूरत है।

रेलवे स्टेशनों पर मिलेगा आंध्र पॉपकॉर्न

नायडू ने कहा कि रेलवे स्टेशनों पर आंध्र पॉपकॉर्न और अराकू कॉफी की बिक्री के लिए काउंटर स्थापित करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि हल्दी, मक्का, मिर्च और जलीय कृषि उत्पादों में मूल्यवर्धन कर उन्हें वैश्विक बाजार तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। इससे किसानों की आय बढ़ाने के साथ कृषि को आर्थिक शक्ति बनाने में मदद मिलेगी।

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