नई दिल्ली : एडीपी रिसर्च की People at Work 2026 रिपोर्ट के अनुसार, भारत में बिना भुगतान अतिरिक्त काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक है। 2025 में 36 बाजारों के 39,000 से अधिक वयस्क कर्मचारियों पर किए गए सर्वेक्षण में 24 प्रतिशत भारतीय कर्मचारियों ने सप्ताह में 16 घंटे या उससे अधिक बिना भुगतान काम करने की बात कही।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 40 प्रतिशत कर्मचारी हर सप्ताह छह से 15 घंटे अतिरिक्त बिना भुगतान काम करते हैं। यानी सर्वे में शामिल करीब दो-तिहाई भारतीय कर्मचारी सप्ताह में कम से कम छह घंटे बिना भुगतान अतिरिक्त काम करते हैं। इसके मुकाबले वैश्विक स्तर पर 12 प्रतिशत कर्मचारी 16 घंटे या उससे अधिक और 26 प्रतिशत छह से 15 घंटे बिना भुगतान काम करते हैं। 16 घंटे या उससे अधिक अतिरिक्त काम करने वालों के मामले में तुर्किये 23 प्रतिशत के साथ दूसरे और ऑस्ट्रिया 21 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर रहा। अमेरिका में यह हिस्सेदारी 20 प्रतिशत थी।
रिपोर्ट में कहा गया कि पद का स्तर बिना भुगतान अतिरिक्त काम से सबसे अधिक जुड़ा कारक रहा। वरिष्ठ प्रबंधकों और शीर्ष अधिकारियों में आधे ने सप्ताह में कम से कम छह घंटे अतिरिक्त काम करने की बात कही, जबकि 20 प्रतिशत ने 16 घंटे या उससे अधिक बिना भुगतान काम किया। व्यक्तिगत स्तर के कर्मचारियों में यह आंकड़ा क्रमशः 26 और नौ प्रतिशत रहा।
दूर से काम करने वाले कर्मचारियों में 13 प्रतिशत ने 16 घंटे या उससे अधिक अतिरिक्त काम की जानकारी दी, जबकि हाइब्रिड और कार्यालय से काम करने वालों में यह हिस्सेदारी 12-12 प्रतिशत रही।
एडीपी के अनुसार, अधिक अतिरिक्त काम हमेशा अधिक उत्पादकता में तब्दील नहीं होता। बिना भुगतान काम के घंटे बढ़ने के साथ तनाव बढ़ने और कार्यस्थल पर बेहतर स्थिति महसूस करने की संभावना घटने की प्रवृत्ति देखी गई। वहीं, अधिक घंटे काम करने वाले कर्मचारियों में नौकरी बदलने की इच्छा भी बढ़ी।