ब्रिक्स के जरिए आर्थिक भगोड़ों पर शिकंजा कसने की भारत की तैयारी, विदेश में छिपी संपत्तियों तक पहुंच होगी आसान 
बिजनेस

ब्रिक्स के जरिए आर्थिक भगोड़ों पर शिकंजा कसने की भारत की तैयारी, विदेश में छिपी संपत्तियों तक पहुंच होगी आसान

ब्रिक्स मंच पर भारत की पहल से भगोड़े आर्थिक अपराधियों की विदेशों में छिपी संपत्तियों का तेजी से पता लगाने, जब्ती और एसेट रिकवरी के लिए मानकीकृत व समयबद्ध सूचना-साझा तंत्र तैयार होगा

Goutam Ojha

नई दिल्ली : विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी जैसे आर्थिक अपराधियों के देश छोड़कर भागने के बाद भारत के सामने चुनौती केवल उन्हें वापस लाने की नहीं रहती, बल्कि विदेशों में छिपे उनके धन और संपत्तियों का पता लगाने की भी होती है। अलग-अलग देशों की एजेंसियों से जानकारी जुटाने में लगने वाला समय जांच और संपत्ति की रिकवरी, दोनों को प्रभावित करता है। ऐसे मामलों से निपटने के लिए भारत अब ब्रिक्स के मंच पर एक व्यावहारिक और तेज सहयोग तंत्र विकसित करने की कोशिश कर रहा है।

अब नहीं करना होगा इंतजार

प्रस्तावित ब्रिक्स फ्रेमवर्क में वित्तीय सूचनाओं के मानकीकृत और समयबद्ध आदान-प्रदान, जांच एजेंसियों के बीच समन्वय तथा विदेशों में मौजूद संपत्तियों का पता लगाने और उन्हें जब्त करने में सहयोग पर जोर है। इसका उद्देश्य ऐसा सिस्टम तैयार करना है, जिसमें आर्थिक अपराध से जुड़ी जानकारी के लिए महीनों इंतजार न करना पड़े।

इस व्यवस्था के तहत ब्रिक्स देशों के बीच एसेट रिकवरी एक्सपर्ट नेटवर्क, फोकल पॉइंट्स की डायरेक्टरी और स्टैंडर्डाइज्ड इन्फॉर्मेशन एक्सचेंज टेम्पलेट्स तैयार किए जा रहे हैं। भगोड़े आर्थिक अपराधियों से जुड़े मामलों में अनौपचारिक सहयोग के लिए रिपॉजिटरी और कानून-प्रवर्तन अधिकारियों के बीच सीधे संपर्क का नेटवर्क भी विकसित करने की योजना है।

सूचनाओं के आदान-प्रदान के मानकीकृत प्रारूपों पर सहमति बनी

भारत में जून और अगस्त में हुई बैठकों में इस दिशा में प्रगति हुई है। अगस्त में प्रारंभिक जांच के दौरान अधिकारियों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान के मानकीकृत प्रारूपों पर सहमति बनी।

यह सहयोग केवल बैंक खातों तक सीमित नहीं रहेगा। फिनटेक, डिजिटल एसेट्स और सीमा पार डिजिटल लेनदेन बढ़ने के साथ वित्तीय लेनदेन और संपत्तियों से जुड़ी डिजिटल जानकारी तेजी से साझा करना भी महत्वपूर्ण होगा।

हालांकि, नया फ्रेमवर्क किसी आरोपी के प्रत्यर्पण की मौजूदा कानूनी प्रक्रिया को खत्म नहीं करेगा। संबंधित देश के घरेलू कानून और न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही प्रत्यर्पण होगा। लेकिन तेज और विश्वसनीय वित्तीय जानकारी मिलने से भारत के लिए विदेश में मौजूद धन-संपत्ति को ट्रैक करना और कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाना काफी आसान हो सकता है।

SCROLL FOR NEXT