भारत-अफगानिस्तान ने व्यापार और आर्थिक सहयोग मजबूत करने के उपायों की समीक्षा की 
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भारत-अफगानिस्तान ने व्यापार और आर्थिक सहयोग मजबूत करने के उपायों की समीक्षा की

दोनों देशों ने शुल्क रियायत, माल ढुलाई संपर्क, बंदरगाह सुविधाओं और व्यापारिक आंकड़ों के आदान-प्रदान को मजबूत कर द्विपक्षीय व्यापार व आर्थिक साझेदारी को नई गति देने का संकल्प दोहराया

नई दिल्ली : भारत और अफगानिस्तान के बीच व्यापार एवं आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने के उपायों पर चर्चा के लिए भारत-अफगानिस्तान संयुक्त कार्य समूह की वर्चुअल बैठक हुई। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार को आसान बनाने और कारोबारियों के लिए सुविधाएं बढ़ाने से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई।

बैठक में सीमा शुल्क सहयोग, अफगान व्यापारियों के लिए वीजा सुविधा, बैंकिंग एवं वित्तीय सहयोग, दवा और कृषि व्यापार, ऊर्जा सहयोग, निवेश और व्यापार प्रोत्साहन जैसे विषय प्रमुख रहे। इसके अलावा शुल्क में रियायत, माल ढुलाई संपर्क और बंदरगाह से जुड़े मुद्दों पर भी दोनों पक्षों ने विचार-विमर्श किया।

संस्थागत सहयोग मजबूत करने पर चर्चा

दोनों देशों ने विभिन्न क्षेत्रों में संस्थागत सहयोग को मजबूत करने और चर्चा किए गए मुद्दों पर आगे कार्रवाई करने पर सहमति जताई। इसमें सीमा शुल्क और व्यापार संबंधी आंकड़ों के आदान-प्रदान को बढ़ाना, दवा तथा कृषि क्षेत्र में नियामकीय सहयोग मजबूत करना और व्यापार संपर्क को बेहतर बनाना शामिल है।

बैठक में निवेश और कारोबारी समुदायों के बीच सहयोग बढ़ाने के उपायों पर भी चर्चा हुई। दोनों पक्षों का मानना है कि बेहतर व्यापार संपर्क और प्रक्रियाओं को आसान बनाने से द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा मिल सकता है।

निवेश संबंधों को मजबूत करने की जताई प्रतिबद्धता

भारत और अफगानिस्तान ने अपने व्यापार, वाणिज्य और निवेश संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों देशों ने बैठक में उठाए गए मुद्दों पर नियमित संपर्क बनाए रखने और आगे की प्रगति सुनिश्चित करने पर भी सहमति व्यक्त की।

बैठक में दोनों देशों के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालयों, सीमा शुल्क विभागों, नियामकीय प्राधिकरणों और राजनयिक मिशनों के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बातचीत ऐसे समय हुई है जब दोनों देश व्यापार मार्गों, भुगतान व्यवस्था और क्षेत्रीय संपर्क से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों के समाधान पर जोर दे रहे हैं।

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