मुंबई : नीति आयोग के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अनुराग जैन ने शुक्रवार को कहा कि भारत ने आर्थिक वृद्धि के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लिए समावेशी विकास सुनिश्चित करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि आर्थिक प्रगति का लाभ समाज के सबसे निचले तबके तक पहुंचना चाहिए।
वैश्विक फिनटेक सम्मेलन में जैन ने कहा कि कुछ राज्यों ने स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन किया है, जबकि कुछ राज्य अभी पीछे हैं। ऐसे राज्यों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आर्थिक समावेशन के जरिये 2047 तक समृद्धि हासिल करने के लिए भारत के पास मजबूत आधार है।
जैन के अनुसार, प्रत्येक व्यक्ति को बेहतर शिक्षा और लाभकारी रोजगार या उद्यमिता के लिए जरूरी कौशल तक पहुंच मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विकास को केवल प्रति व्यक्ति आय के आधार पर नहीं मापा जाना चाहिए, बल्कि यह भी देखना होगा कि आबादी के निचले 10 या 20 प्रतिशत हिस्से तक समृद्धि कितनी पहुंची है।
तकनीक के प्रभाव पर उन्होंने कहा कि भविष्य में नई प्रौद्योगिकियां मानव उत्पादकता बढ़ाएंगी और इससे आय में भी वृद्धि होगी। हालांकि, यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि तकनीकी प्रगति का लाभ कुछ लोगों तक सीमित न रह जाए।
नीति आयोग के सीईओ ने कहा कि सरकार नियमन के जरिये प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देगी और बाजार में गड़बड़ी, एकाधिकार या अल्पाधिकार को अनुमति नहीं दी जाएगी।
सम्मेलन में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के प्रबंध निदेशक राम मोहन राव अमारा ने बताया कि प्रधानमंत्री जन धन योजना के खातों में एसबीआई की हिस्सेदारी करीब 30 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि शुरुआत में शून्य शेष वाले इन खातों में अब औसत शेष राशि करीब 5,000 रुपये है। बैंक अब इन ग्राहकों को बचत से आगे बीमा सुरक्षा से जोड़ने पर भी ध्यान दे रहा है।