नयी दिल्ली : पश्चिम एशिया में व्यवधान के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ रहे दबाव के प्रभाव को कम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने घर से काम और हवाई यात्रा घटाने जैसे कदम उठाने का सुझाव दिया है। IEA के अनुसार अल्पावधि में व्यावसायिक हवाई यात्राओं में करीब 40 प्रतिशत कमी संभव है और इससे विमान ईंधन की मांग सात से 15 प्रतिशत तक घट सकती है।
क्या है कारण : अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले और तेहरान की व्यापक जवाबी कार्रवाई के बाद तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत आयात करता है और उसके लिए वैश्विक कीमतों में यह उछाल बड़ा व्यापक आर्थिक जोखिम उत्पन्न करता है, चालू खाते के घाटे को बढ़ाता है, रुपये पर दबाव डालता है और घरों व व्यवसायों के लिए ईंधन लागत बढ़ाता है। पेट्रोल और डीजल की कीमतें फिलहाल नहीं बढ़ाई गई हैं लेकिन रसोई गैस एलपीजी के दाम 60 रुपये प्रति सिलेंडर बढ़ाए गए हैं। आईईए ने कहा, पश्चिम एशिया का संघर्ष वैश्विक तेल बाजार के इतिहास में सबसे बड़ी आपूर्ति बाधा लेकर आया है क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है।
क्या है स्थिति : आम तौर पर हर दिन करीब 1.5 करोड़ बैरल कच्चा तेल और 50 लाख बैरल तेल उत्पाद इस जलडमरूमध्य से गुजरते थे, जो वैश्विक तेल खपत का लगभग 20 प्रतिशत है। भारत का कच्चे तेल का आधा आयात, 40 प्रतिशत गैस आयात और 85-90 प्रतिशत एलपीजी की आपूर्ति इसी मार्ग से होती थी। यह प्रवाह अब बहुत कम रह गया है। आपूर्ति में कमी का वैश्विक बाजारों पर बड़ा असर पड़ रहा है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई हैं और कुछ परिष्कृत उत्पाद खासतौर पर डीजल, विमान ईंधन तथा एलपीजी की कीमतें काफी बढ़ गई हैं। ऊंची कीमतों के घरों, व्यवसायों तथा व्यापक अर्थव्यवस्था पर असर को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं।
सुझाए गए प्रमुख उपाय : मुख्य उपायों में आवागमन के लिए ईंधन खपत कम करने, घर से काम (वर्क फ्रॉम होम/रिमोट वर्क) हेतु दूरस्थ कार्य को बढ़ावा देना, राजमार्गों पर गति सीमा कम से कम 10 किलोमीटर प्रति घंटा घटाना, सार्वजनिक परिवहन एवं साझा वाहन उपयोग को प्रोत्साहित करना तथा बड़े शहरों में निजी वाहनों की आवाजाही सीमित करना शामिल है। अन्य उपायों में वाहन चलाने की दक्षता बढ़ाना, व्यावसायिक हवाई यात्राएं कम करना, गैर-जरूरी उपयोग में एलपीजी के विकल्प अपनाना और औद्योगिक ईंधन दक्षता बढ़ाना शामिल है। राष्ट्रीय स्तर पर जिन कामों में संभव हो, सप्ताह में तीन अतिरिक्त दिन घर से काम करने से कारों से तेल खपत में दो से छह प्रतिशत की कमी आ सकती है, जबकि व्यक्तिगत चालकों के लिए औसतन करीब 20 प्रतिशत तक कमी संभव है।
गति सीमा कम करना : राजमार्गों पर गति सीमा 10 किलोमीटर प्रति घंटा कम करने से व्यक्तिगत चालक की तेल खपत पांच से 10 प्रतिशत और निजी कारों की कुल खपत एक से छह प्रतिशत तक घट सकती है। मालवाहक ट्रकों में भी उनकी पहले से कम गति के कारण करीब पांच प्रतिशत बचत हो सकती है।
सार्वजनिक परिवहन :निजी कारों से यात्रा कम कर बसों तथा ट्रेनों जैसे सार्वजनिक परिवहन की ओर जाने से कारों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर तेल खपत एक से तीन प्रतिशत तक घट सकती है।’’