आईसीएआई का नया सस्टेनेबिलिटी एश्योरेंस मानक 2027 से होगा लागू, वैश्विक नियमों के करीब आएगा भारत पांच लाख से अधिक सदस्यों वाला आईसीएआई विभिन्न पेशेवर गतिविधियों के मानक निर्धारित करता है।
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आईसीएआई का नया सस्टेनेबिलिटी एश्योरेंस मानक 2027 से होगा लागू, वैश्विक नियमों के करीब आएगा भारत

Goutam Ojha

नई दिल्ली : इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) ने कंपनियों और अन्य संस्थाओं के सस्टेनेबिलिटी खुलासों की जांच के लिए नया मानक पेश किया है। ‘स्टैंडर्ड ऑन सस्टेनेबिलिटी एश्योरेंस 5000’ (एसएसए 5000) एक अप्रैल 2027 से प्रभावी होगा। इसका उद्देश्य भारत में टिकाऊ विकास से जुड़ी रिपोर्टिंग को अधिक सुसंगत और विश्वसनीय बनाना तथा देश के ढांचे को वैश्विक प्रक्रियाओं के करीब लाना है।

नया मानक जलवायु परिवर्तन, श्रम प्रथाओं और जैव-विविधता जैसे विषयों से संबंधित खुलासों पर लागू होगा। इसके तहत सस्टेनेबिलिटी संबंधी जानकारी की जांच और आश्वासन के लिए सामान्य आवश्यकताएं तथा एक व्यापक ढांचा निर्धारित किया गया है।

भारतीय मानक में हैं दो विशेष अपवाद

आईसीएआई अध्यक्ष प्रसन्न कुमार डी ने कहा कि नए ढांचे से निवेशकों और अन्य हितधारकों का भरोसा मजबूत होने की उम्मीद है। उनके अनुसार, एसएसए 5000 सिद्धांतों पर आधारित है और भारत में लागू विभिन्न रिपोर्टिंग व्यवस्थाओं को ध्यान में रखते हुए सस्टेनेबिलिटी एश्योरेंस का दायरा बढ़ाता है।

आईसीएआई के एक अधिकारी के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय सस्टेनेबिलिटी एश्योरेंस मानक से भारतीय मानक में दो विशेष अपवाद रखे गए हैं। इनमें संयुक्त ऑडिट और भविष्य से संबंधित अनुमानित बयान शामिल हैं, जिन्हें एसएसए 5000 से बाहर रखा गया है।

अप्रैल से वापस होंगे एसएसए 3000 और एसएई 3410 मानक

नए मानक के लागू होने पर मौजूदा सस्टेनेबिलिटी एश्योरेंस मानक एसएसए 3000 और एसएई 3410 को अप्रैल 2027 से वापस ले लिया जाएगा। आईसीएआई उपाध्यक्ष मंगेश किनारे ने कहा कि नया मानक अलग-अलग रिपोर्टिंग ढांचों के बीच कठोरता और एकरूपता बनाए रखते हुए आश्वासन का दायरा विस्तृत करेगा।

संस्थान बेहतर कॉरपोरेट रिपोर्टिंग को बढ़ावा देने के लिए ‘सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग मैच्योरिटी मॉडल’ जैसी पहल भी कर रहा है। पांच लाख से अधिक सदस्यों वाला आईसीएआई विभिन्न पेशेवर गतिविधियों के मानक निर्धारित करता है।

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