रिन्यूएबल हाइड्रोजन का प्रमुख केंद्र बन रहा गुजरात, 2035 तक 30 लाख टन का लक्ष्य 
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रिन्यूएबल हाइड्रोजन का प्रमुख केंद्र बन रहा गुजरात, 2035 तक 30 लाख टन का लक्ष्य

Goutam Ojha

नई दिल्ली : बड़े रिफाइनरी और अमोनिया उत्पादन आधार, विशाल सौर-पवन क्षमता, बंदरगाहों और राज्य की प्रोत्साहन नीति के कारण गुजरात भारत में रिन्यूएबल हाइड्रोजन विकास के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है। हालांकि, राज्य में बड़े पैमाने की अधिकांश परियोजनाएं अभी व्यवहार्यता आकलन के चरण में हैं। एसएंडपी ग्लोबल की रिपोर्ट ‘Gujarat green hydrogen: Turning an ambition into reality’ में यह जानकारी दी गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत की करीब 40 प्रतिशत रिफाइनरी क्षमता और लगभग 30 प्रतिशत अमोनिया क्षमता गुजरात में है। राज्य में सौर और पवन ऊर्जा की संयुक्त क्षमता करीब 50 गीगावाट है। इसके अलावा, भारत का कम से कम 40 प्रतिशत समुद्री व्यापार गुजरात के बंदरगाहों के जरिए होता है। इससे हाइड्रोजन के उत्पादन, परिवहन और संभावित निर्यात के लिए राज्य को औद्योगिक मांग और जरूरी बुनियादी ढांचा दोनों मिलते हैं।

गुजरात के ऊर्जा एवं पेट्रोकेमिकल्स विभाग ने दिसंबर 2025 में अपनी हाइड्रोजन रणनीति को अंतिम रूप दिया था। इसमें उत्पादन लक्ष्य के साथ शुरुआती परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता का प्रावधान है। पहली 500 मेगावाट इलेक्ट्रोलाइजर क्षमता को विभिन्न प्रोत्साहन दिए जाएंगे। इनमें पात्र इलेक्ट्रोलाइजर घटकों, बैटरी स्टोरेज, ऑक्सीजन भंडारण और जल विलवणीकरण सुविधाओं के लिए पूंजीगत सब्सिडी शामिल है।

नीति में हाइड्रोजन की मांग बढ़ाने के लिए रिफ्यूलिंग स्टेशनों, हाइड्रोजन बसों और भारी वाहनों को सब्सिडी देने का प्रावधान भी है। औद्योगिक उपयोग वाले रिन्यूएबल हाइड्रोजन और प्राकृतिक गैस नेटवर्क में मिश्रित हाइड्रोजन की लागत की प्रतिपूर्ति की व्यवस्था भी की गई है।

एसएंडपी ग्लोबल के अनुसार, गुजरात ने 2035 तक हर साल 30 लाख मीट्रिक टन रिन्यूएबल हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखा है, जो रिपोर्ट में शामिल भारतीय राज्यों में सबसे बड़ा है। हालांकि, एजेंसी ने इसे बेहद महत्वाकांक्षी लक्ष्य बताया है।

गुजरात में उन्नत चरण की परियोजनाओं की संख्या अन्य राज्यों की तुलना में अधिक है, लेकिन आंध्र प्रदेश और ओडिशा में उन्नत चरण वाली परियोजनाओं की क्षमता ज्यादा है। गुजरात की अधिकांश बड़ी परियोजनाएं अभी शुरुआती व्यवहार्यता चरण में हैं। एसआईजीएचटी कार्यक्रम से हाल में मिले समर्थन के बाद इनके आगे बढ़ने की संभावना है।

राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का लक्ष्य 2030 तक सालाना 50 लाख मीट्रिक टन उत्पादन का है। एसआईजीएचटी कार्यक्रम के लिए शुरुआती तौर पर 170 अरब रुपये आवंटित किए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े रिन्यूएबल हाइड्रोजन और उसके डेरिवेटिव के ऑफटेक समझौतों में भारतीय डेवलपर्स की हिस्सेदारी 2024-25 में 40 प्रतिशत और 2026 में अब तक 80 प्रतिशत रही है। पश्चिमी तट पर स्थित होने से गुजरात को यूरोपीय बाजार में अमोनिया निर्यात का अवसर मिल सकता है, हालांकि मध्य पूर्व और चीन से प्रतिस्पर्धा के बीच सरकारी समर्थन महत्वपूर्ण रहेगा।

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