ई20 पेट्रोल से माइलेज थोड़ी घट सकती है, लेकिन इससे मिलने वाले फायदे कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं। 
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E20 पेट्रोल पर सरकार का जवाब, माइलेज थोड़ी घटेगी, फायदे ज्यादा

सरकार ने ई20 पेट्रोल पर उठे सवालों का जवाब देते हुए कहा कि माइलेज में 3-5% कमी संभव है, लेकिन कार्बन उत्सर्जन घटाने, इंजन की एंटी-नॉक क्षमता बढ़ाने और बेहतर दहन व पिकअप जैसे फायदे इसे भविष्य का स्वच्छ व टिकाऊ ईंधन बनाते हैं

नई दिल्ली : 20 फीसदी एथनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) को लेकर उठ रहे सवालों के बीच पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इससे कुछ वाहनों की माइलेज तीन से पांच फीसदी तक कम हो सकती है, लेकिन इसके बदले मिलने वाले फायदे कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं।

मंत्रालय ने कहा कि E20 ईंधन से कार्बन उत्सर्जन कम होता है, इंजन की एंटी-नॉक क्षमता बढ़ती है, दहन बेहतर होता है और वाहन की पिकअप में भी सुधार होता है। यही वजह है कि इसे भविष्य के स्वच्छ और टिकाऊ ईंधन के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है।

जल्दबाजी में नहीं लिया गया फैसला

मंत्रालय ने कहा कि एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम कोई नया प्रयोग नहीं है। इसकी शुरुआत 2001 में पायलट परियोजनाओं से हुई थी और कई वर्षों तक परीक्षण, वाहन कंपनियों से सलाह-मशविरा और उत्पादन क्षमता बढ़ाने के बाद ही देशभर में ई20 लागू किया गया है।

सरकार ने 2022 में तय समय से पहले 10 फीसदी एथनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल किया था और अब 2025-26 में 20 फीसदी मिश्रण का लक्ष्य भी पूरा कर लिया है।

पुराने वाहनों पर क्या असर होगा?

ई20 से पुराने वाहनों के खराब होने की आशंकाओं को भी मंत्रालय ने खारिज किया है। उसके अनुसार, देशभर में लागू करने से पहले इंजन, ईंधन प्रणाली, जंग-रोधी क्षमता और विभिन्न पुर्जों पर व्यापक परीक्षण किए गए।

मारुति सुजुकी और हीरो मोटोकॉर्प समेत वाहन निर्माताओं की प्रतिक्रिया का हवाला देते हुए मंत्रालय ने कहा कि ई20 के कारण जंग लगने, असामान्य घिसाव या पुर्जों के जल्दी खराब होने जैसी कोई शिकायत सामने नहीं आई है।

अलग-अलग तरह का पेट्रोल क्यों नहीं?

मंत्रालय ने पेट्रोल पंपों पर शुद्ध पेट्रोल, ई10 और ई20 तीनों तरह के ईंधन उपलब्ध कराने की मांग को भी व्यावहारिक नहीं माना। उसका कहना है कि इससे पूरे देश में अलग-अलग आपूर्ति व्यवस्था बनानी पड़ेगी, जिससे लागत और संचालन दोनों जटिल हो जाएंगे।

कीमत कम करना नहीं, आयात घटाना लक्ष्य

सरकार ने साफ किया कि ई20 का मकसद पेट्रोल सस्ता करना नहीं है। एथनॉल की कीमत किसानों के हितों को ध्यान में रखकर तय की जाती है, इसलिए कई बार यह सामान्य पेट्रोल से महंगा भी पड़ सकता है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाना, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना और प्रदूषण कम करना है।

1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक विदेशी मुद्रा की हुई बचत

मंत्रालय के अनुसार, 2014-15 से अब तक एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम से 1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। इससे करीब 316 लाख टन कच्चे तेल का आयात कम हुआ, 952 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन घटा और किसानों को 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया।

मंत्रालय ने लोगों से ई20 को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक जानकारियों से बचने की अपील करते हुए कहा कि इस ईंधन को देशभर में लागू करने से पहले सभी जरूरी वैज्ञानिक और तकनीकी परीक्षण पूरे किए जा चुके हैं।

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