नयी दिल्ली : देश में सोने का आयात वित्त वर्ष 2025-26 में 24 प्रतिशत बढ़कर अब तक के उच्चतम स्तर 71.98 अरब डॉलर पहुंच गया है। यह वृद्धि मुख्य रूप से कीमती धातु की ऊंची कीमतों के कारण हुई है। वित्त वर्ष 2024-25 में सोने का आयात 58 अरब डॉलर रहा था, जबकि 2023-24 में यह 45.54 अरब डॉलर और 2022-23 में 35 अरब डॉलर था। वित्त वर्ष 2025-26 में मात्रा के हिसाब से सोने का आयात 4.76 प्रतिशत घटकर 721.03 टन रहा, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 757.09 टन था। इसी तरह, चांदी का आयात बीते वित्त वर्ष में लगभग 150 प्रतिशत बढ़कर 12 अरब डॉलर हो गया। मात्रा के लिहाज से यह 42 प्रतिशत बढ़कर 7,334.96 टन रहा। इन कीमती धातुओं के आयात में वृद्धि से देश का व्यापार घाटा वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 333.2 अरब डॉलर पहुंच गया।
कीमत बढ़ी, मात्रा घटी : वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, सोने की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण आयात मूल्य बढ़ा है, जबकि मात्रा में गिरावट आई है। सोने के आयात की कीमत वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 99,825.38 डॉलर प्रति किलोग्राम हो गई, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 76,617.48 डॉलर प्रति किलोग्राम थी। इसी दौरान आयात मात्रा 757.09 टन से घटकर 721.03 टन रह गई।
आयात का सबसे बड़ा स्रोत : स्विट्जरलैंड सोने के आयात का सबसे बड़ा स्रोत रहा, जिसकी हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत है। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात (16 प्रतिशत से अधिक) और दक्षिण अफ्रीका (लगभग 10 प्रतिशत) का स्थान है। सोना देश के कुल आयात का पांच प्रतिशत से अधिक हिस्सा है। भारत दुनिया में चीन के बाद सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है और इसका उपयोग मुख्य रूप से आभूषण उद्योग में होता है। आंकड़ों के अनुसार, स्विट्जरलैंड से आयात 11.36 प्रतिशत बढ़कर 24.27 अरब डॉलर हो गया।
चालू खाता घाटा : भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के अनुसार, चालू खाता घाटा (सीएडी) दिसंबर तिमाही में बढ़कर 13.2 अरब डॉलर (जीडीपी का 1.3 प्रतिशत) हो गया, जबकि पिछले वर्ष 2024-25 की इसी अवधि में यह 11.3 अरब डॉलर था। हालांकि, चालू खाता घाटा अप्रैल-दिसंबर 2025 में घटकर 30.1 अरब डॉलर (जीडीपी का एक प्रतिशत) रहा, जबकि एक वर्ष पहले इसी अवधि में यह 36.6 अरब डॉलर (जीडीपी का 1.3 प्रतिशत) था।