नई दिल्ली : भारत ने ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स 2026 में अब तक का सबसे ऊंचा कंपोजिट स्कोर हासिल किया है, लेकिन इसके बावजूद वैश्विक रैंकिंग में अपेक्षित बढ़त नहीं मिल सकी। ताजा रिपोर्ट में भारत 197 देशों की सूची में 125वें स्थान पर है, जबकि वर्ष 2021 में उसकी रैंकिंग 127वीं थी। यानी पांच वर्षों में भारत केवल दो पायदान ऊपर चढ़ पाया है।
रेजिडेंसी और सिटिजनशिप एडवाइजरी फर्म ग्लोबल सिटीजन सॉल्यूशंस की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का कंपोजिट स्कोर बढ़कर 45.1 हो गया है, जो अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। इसके बावजूद रिपोर्ट में भारत को "सबसे बड़ा अपवाद" बताया गया है, क्योंकि तेज आर्थिक विकास और बढ़ते वैश्विक प्रभाव का लाभ भारतीय पासपोर्ट की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता में पूरी तरह दिखाई नहीं देता।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय पासपोर्ट की सबसे बड़ी कमजोरी उसकी सीमित वीजा-फ्री यात्रा सुविधा है। पिछले पांच वर्षों में भारत का मोबिलिटी स्कोर 18 से बढ़कर लगभग 23 जरूर हुआ है, लेकिन इसी अवधि में कई अन्य देशों ने अपने नागरिकों के लिए अधिक देशों में वीजा-मुक्त प्रवेश सुनिश्चित कर लिया। यही वजह है कि बेहतर स्कोर के बावजूद भारत की समग्र रैंकिंग में बड़ा सुधार नहीं हो सका।
रिपोर्ट में भारत के लिए सबसे सकारात्मक पहलू क्वालिटी ऑफ लाइफ रहा। स्वास्थ्य सेवाओं, सुरक्षा, जलवायु और सामाजिक ढांचे जैसे मानकों पर देश ने उल्लेखनीय सुधार करते हुए 13 स्थानों की छलांग लगाई और 118वें स्थान पर पहुंच गया। इंडेक्स के इतिहास में यह भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन माना गया है।
एशियाई देशों में सिंगापुर का पासपोर्ट सबसे मजबूत बना हुआ है। ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स 2026 में उसे वैश्विक स्तर पर 10वां स्थान मिला और वह शीर्ष-10 में जगह बनाने वाला एशिया का एकमात्र देश रहा। सिंगापुर ने लगातार पांचवें वर्ष मोबिलिटी श्रेणी में पूर्ण अंक हासिल किए, जबकि निवेश आकर्षित करने के मामले में भी वह दुनिया में शीर्ष पर रहा।
रिपोर्ट के अनुसार, हांगकांग ने एक वर्ष में अपनी मोबिलिटी रैंकिंग में बड़ा सुधार करते हुए 46वें स्थान से 31वें स्थान तक पहुंच बनाई। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने सबसे बड़ी छलांग लगाते हुए मोबिलिटी श्रेणी में 26वें स्थान से तीसरे स्थान तक का सफर तय किया। विशेषज्ञों ने इसका श्रेय सक्रिय कूटनीति और द्विपक्षीय समझौतों को दिया है।
इस वर्ष भी वैश्विक पासपोर्ट रैंकिंग में यूरोप का वर्चस्व बरकरार रहा। शीर्ष-10 में नौ यूरोपीय देशों ने जगह बनाई। स्वीडन लगातार तीसरे वर्ष पहले स्थान पर रहा, जबकि स्विट्जरलैंड और फिनलैंड क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। इन देशों ने मोबिलिटी, निवेश और जीवन गुणवत्ता तीनों मानकों पर संतुलित प्रदर्शन किया।
रिपोर्ट में चीन की प्रगति को भी रेखांकित किया गया है। वर्ष 2021 में 117वें स्थान पर रहा चीन अब 104वें स्थान पर पहुंच गया है। इस दौरान उसका कंपोजिट स्कोर 48.3 से बढ़कर 54.8 हो गया। रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने वीजा-फ्री यात्रा, निवेश आकर्षण और जीवन गुणवत्ता—तीनों क्षेत्रों में लगातार सुधार दर्ज किया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया के सबसे मजबूत और सबसे कमजोर पासपोर्ट के बीच का अंतर लगातार बढ़ता जा रहा है। वर्तमान में केवल 38.5 प्रतिशत देशों के बीच ही नागरिकों को परस्पर समान वीजा सुविधा प्राप्त है। ऐसे में अधिकांश देशों के यात्रियों के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा अब भी अलग-अलग नियमों और प्रतिबंधों के अधीन बनी हुई है।
ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स 2026 में कुल 197 देशों का मूल्यांकन वीजा-फ्री यात्रा, निवेश आकर्षण और जीवन गुणवत्ता जैसे प्रमुख मानकों के आधार पर किया गया है।