नई दिल्ली : पश्चिम एशिया संकट के कारण विमान ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में फिर तेज बढ़ोतरी के बीच सरकार ATF मूल्य स्थिरीकरण कोष को दोबारा शुरू या नए स्वरूप में लागू करने पर विचार कर रही है। सरकार एयरलाइंस और तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के साथ भी लगातार बातचीत कर रही है।
नागर विमानन मंत्री के. राममोहन नायडू ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट ATF की कीमतों पर बड़ा बोझ डाल रहा है और मंत्रालय एयरलाइंस तथा OMCs के साथ इस मुद्दे पर चर्चा कर रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, सरकार मूल्य स्थिरीकरण कोष को फिर से सक्रिय करने की संभावनाओं पर विचार कर रही है।
दरअसल, केंद्र सरकार ने जून 2026 में एयरलाइंस को राहत देने के लिए OMCs को ₹10,000 करोड़ तक की एकमुश्त बजटीय सहायता देने की मंजूरी दी थी। इसका उद्देश्य असाधारण वैश्विक ईंधन कीमतों के बीच घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए ATF की कीमतों को स्थिर रखना था। योजना के तहत OMCs को ब्याज मुक्त अग्रिम देने की व्यवस्था थी।
हालांकि, शुरुआती दौर में ATF कीमतें नीचे आने के कारण किसी एयरलाइन ने इस योजना का लाभ लेने में रुचि नहीं दिखाई और योजना प्रभावी रूप से समाप्त हो गई। अब ईंधन कीमतों में फिर उछाल के बाद सरकार इसे नए स्वरूप में लाने पर विचार कर रही है।
ATF किसी एयरलाइन की लागत का सबसे बड़ा हिस्सा है। सामान्य परिस्थितियों में इसकी हिस्सेदारी करीब 40% होती है, जबकि मौजूदा संकट में यह 55-60% तक पहुंच गई है। लागत बढ़ने का असर टिकट किराये पर भी पड़ रहा है। इंडिगो ने हाल में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर ईंधन अधिभार बढ़ाया है।
एयरलाइंस ने सरकार से ATF मूल्य निर्धारण व्यवस्था में भी बदलाव की मांग की है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस ने अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क के बजाय लागत और उचित मार्जिन पर आधारित फॉर्मूला अपनाने की मांग की है।
यदि स्थिरीकरण योजना को नए रूप में लागू किया जाता है तो इसका मकसद एयरलाइंस की लागत में अचानक आने वाले झटकों को कम करना और यात्रियों पर बढ़ते किराये का दबाव नियंत्रित करना होगा।