नयी दिल्ली : पश्चिम एशिया संघर्ष, कमजोर होता रुपया और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से भारत की वृद्धि पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर विदेशी निवेशक आशंकित हैं, जिससे वजह से वे बिकवाली कर रहे हैं। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने मार्च में अब तक घरेलू शेयर बाजार से 1.14 लाख करोड़ रुपये (लगभग 12.3 अरब डॉलर) निकाले हैं। यह FPI की भारतीय बाजार से सबसे बड़ी मासिक निकासी है। इस महीने का एक कारोबारी सत्र अभी बचा है, जिससे निकासी का आंकड़ा और बढ़ सकता है। इससे पहले अक्टूबर, 2024 में FPI ने एक महीने में सबसे अधिक 94,017 करोड़ रुपये की निकासी की थी।
क्या है स्थिति : FPI 2026 में अब तक भारतीय शेयर बाजार से 1.27 लाख करोड़ रुपये की निकासी कर चुके हैं। एनएसडीएल के आंकड़ों के अनुसार, 27 मार्च तक FPI ने 1,13,380 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। इससे पहले फरवरी में FPI ने भारतीय शेयर बाजार में 22,615 करोड़ रुपये का निवेश किया था, जो 17 माह का उच्चस्तर है। बाजार भागीदारों का कहना है कि FPI वैश्विक आर्थिक प्रतिकूल परिस्थितियों और बढ़ी हुई भू-राजनीतिक अनिश्चितता के चलते बिकवाल बने हुए हैं।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ : जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध के बाद वैश्विक शेयर बाजारों में कमजोरी, रुपये में लगातार गिरावट, खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले भारतीय द्वारा भेजे जाने वाले धन में कमी की आशंका और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के भारत की वृद्धि और कंपनियों के लाभ पर असर पड़ने की चिंता के चलते FPI बिकवाली कर रहे हैं। मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रमुख-प्रबंधक शोध हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘अमेरिका में ऊंचे बॉन्ड प्रतिफल और वैश्विक स्तर पर तरलता की स्थिति सख्त होने के चलते भी FPI बिकवाल बने हुए हैं। इससे उनके लिए विकसित बाजार अधिक आकर्षक हो गए हैं।