आईपीओ में विदेशी निवेशकों ने लगाए 85,500 करोड़, शेयर बाजार से निकाले 3.65 लाख करोड़ 
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आईपीओ में विदेशी निवेशकों ने लगाए 85,500 करोड़, शेयर बाजार से निकाले 3.65 लाख करोड़

विदेशी निवेशकों का आईपीओ में बढ़ता रुझान, लेकिन शेयर बाजार से भारी निकासी

Goutam Ojha

नई दिल्ली : विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने भारत के प्राथमिक बाजार में पिछले 12 महीनों के दौरान करीब 85,500 करोड़ रुपये (9.2 अरब डॉलर) का शुद्ध निवेश किया। इसके उलट, इसी अवधि में उन्होंने शेयर बाजार में पहले से सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों से करीब 3.65 लाख करोड़ रुपये (39 अरब डॉलर) निकाल लिए। यह अंतर दिखाता है कि विदेशी निवेशक नए शेयर निर्गमों में दिलचस्पी बनाए हुए हैं, लेकिन व्यापक शेयर बाजार में लगातार बिकवाली कर रहे हैं।

जेएम फाइनेंशियल की 8 अक्टूबर को जारी FII Monthly Flow Tracker – Sep’26 रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर में एफआईआई ने भारतीय शेयरों में 39,660 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 76,030 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। इस दौरान निफ्टी में 6.1 प्रतिशत की गिरावट आई। अगस्त में भी सूचकांक 1.2 प्रतिशत नीचे आया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर में प्राथमिक बाजार में एफआईआई का शुद्ध निवेश 9,310 करोड़ रुपये रहा, जो अगस्त के 12,620 करोड़ रुपये से कम है। दूसरी ओर, द्वितीयक बाजार से उनकी शुद्ध निकासी 48,970 करोड़ रुपये रही, जबकि अगस्त में इसी बाजार में 10,230 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश हुआ था। लगातार दो महीने शुद्ध खरीदार रहने के बाद सितंबर में विदेशी निवेशक फिर बिकवाल बन गए।

घरेलू निवेशकों ने संभाला बाजार

विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बीच घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी ने बाजार को सहारा दिया। सितंबर के अंत में भारतीय शेयर बाजार में एफआईआई की हिस्सेदारी घटकर 13.8 प्रतिशत रह गई, जो अगस्त में 14.2 प्रतिशत और सितंबर 2016 में 19.9 प्रतिशत थी। इसके विपरीत, जून 2026 में डीआईआई की हिस्सेदारी बढ़कर 18.9 प्रतिशत पहुंच गई। दिसंबर 2024 से घरेलू संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी विदेशी निवेशकों से अधिक बनी हुई है।

सितंबर के अंत में भारतीय शेयरों में एफआईआई की अभिरक्षा के तहत संपत्ति (एसेट्स अंडर कस्टडी) 66.2 लाख करोड़ रुपये रही, जो अगस्त के 70.4 लाख करोड़ रुपये से 6 प्रतिशत कम है।

बैंकिंग और ऑटो शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली

सितंबर में बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा क्षेत्र से विदेशी निवेशकों ने 1.37 अरब डॉलर निकाले। तेल एवं गैस क्षेत्र में 71.5 करोड़ डॉलर और ऑटो क्षेत्र में 64.7 करोड़ डॉलर की शुद्ध बिकवाली हुई। दूरसंचार, धातु, एफएमसीजी और बिजली क्षेत्र भी बिकवाली के दबाव में रहे।

इसके उलट, फार्मा क्षेत्र में 22 करोड़ डॉलर और सेवा क्षेत्र में 24.3 करोड़ डॉलर का शुद्ध निवेश आया। रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त में जिन क्षेत्रों में एफआईआई बिकवाल थे, उनमें से किसी भी क्षेत्र में सितंबर के दौरान वे शुद्ध खरीदार नहीं बने।

पांच क्षेत्रों में केंद्रित है विदेशी निवेश

बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाएं, फार्मा, ऑटो, कैपिटल गुड्स और तेल एवं गैस एफआईआई के पोर्टफोलियो के पांच सबसे बड़े क्षेत्र बने रहे। सितंबर में इनका संयुक्त हिस्सा विदेशी निवेशकों की कुल भारतीय शेयर संपत्ति का करीब 60 प्रतिशत था।

बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाओं की हिस्सेदारी अगस्त के 30.1 प्रतिशत से बढ़कर 30.2 प्रतिशत हो गई। फार्मा का हिस्सा 7.7 प्रतिशत से बढ़कर 8 प्रतिशत और कैपिटल गुड्स का हिस्सा 7.3 प्रतिशत से बढ़कर 7.4 प्रतिशत हुआ। वहीं, ऑटो की हिस्सेदारी 7.8 प्रतिशत से घटकर 7.5 प्रतिशत रही, जबकि तेल एवं गैस का हिस्सा 6.5 प्रतिशत पर स्थिर रहा।

उभरते बाजारों में भारत की हिस्सेदारी घटी

एमएससीआई इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स में भारत का भार सितंबर में घटकर 10.7 प्रतिशत रह गया, जो अगस्त में 11.3 प्रतिशत और सितंबर 2025 में 15.2 प्रतिशत था। जेएम फाइनेंशियल के अनुसार, सितंबर में भारत से करीब 4.1 अरब डॉलर की शुद्ध विदेशी निकासी हुई। जापान और दक्षिण कोरिया में भी उल्लेखनीय निकासी दर्ज की गई, जबकि ब्राजील में शुद्ध निवेश आया।

कुल मिलाकर, नए शेयर निर्गमों में विदेशी निवेश जारी रहने के बावजूद सूचीबद्ध शेयरों से बड़ी निकासी बाजार पर दबाव बना रही है। घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी इस दबाव को कुछ हद तक कम कर रही है, लेकिन सितंबर में निफ्टी की तेज गिरावट बताती है कि इससे बाजार की व्यापक कमजोरी पूरी तरह दूर नहीं हुई।

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