नयी दिल्ली : विमानों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन एटीएफ में एथनॉल और कृत्रिम हाइड्रोकार्बन के मिश्रण की सरकार ने अनुमति दे दी है लेकिन इसके लिए अभी कोई लक्ष्य तय नहीं किया गया है। एक सरकारी अधिसूचना से यह जानकारी मिली है। आवश्यक वस्तु अधिनियम (एस्मा) के तहत एटीएफ विपणन नियमन आदेश, 2001 में संशोधन के बाद यह कदम उठाया गया है। इससे एटीएफ की परिभाषा का दायरा बड़ा हो गया है जिससे कृत्रिम हाइड्रोकार्बन के मिश्रण की राह आसान हो गई है। एटीएफ की परिभाषा का विस्तार कर उसमें सिंथेटिक हाइड्रोकार्बन के साथ मिश्रण को शामिल किया गया है।
क्या है उद्देश्य : इस कदम का उद्देश्य उत्सर्जन में कमी लाना और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाना है। पुराने आदेश में संशोधन के तहत एटीएफ को अब ऐसे हाइड्रोकार्बन मिश्रण के रूप में परिभाषित किया गया है, जो आईएस 1571 मानकों के अनुरूप हो या आईएस 17081 मानकों के तहत कृत्रिम हाइड्रोकार्बन के साथ मिश्रित हो। इससे नई तरह के ईंधन को शामिल करने का रास्ता साफ हुआ है। वैश्विक स्तर पर ब्रिटेन एवं जापान जैसे देश टिकाऊ विमानन ईंधन (एसएएफ) के मिश्रण को अनिवार्य बना रहे हैं। यह ईंधन अपशिष्ट तेल, कृषि अवशिष्ट, शहरी कचरे और अन्य नवीकरणीय स्रोतों से तैयार किया जाता है। इसे कृत्रिम या मानव-निर्मित हाइड्रोकार्बन भी कहा जाता है।
क्या है लक्ष्य : भारत ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए वर्ष 2027 तक एक प्रतिशत, 2028 तक दो प्रतिशत और 2030 तक पांच प्रतिशत एसएएफ के मिश्रण का लक्ष्य रखा है। हालांकि, घरेलू उड़ानों में ईंधन के मिश्रण के लिए अभी कोई लक्ष्य तय नहीं किया गया है।