टाटा संस के नए चेयरमैन की तलाश में देरी, नियामकीय अड़चन से अटकी प्रक्रिया 
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टाटा संस के नए चेयरमैन की तलाश में देरी, नियामकीय अड़चन से अटकी प्रक्रिया

नए चेयरमैन की खोज नियामकीय जांच और ट्रस्ट प्रतिनिधित्व पर रोक के कारण ठप, उत्तराधिकार योजना व कॉरपोरेट गवर्नेंस पर सवाल गहरे

नई दिल्ली : टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के नए चेयरमैन की तलाश की प्रक्रिया में देरी हो गई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, समूह के प्रमुख शेयरधारक ट्रस्टों में शामिल सर रतन टाटा ट्रस्ट (एसआरटीटी) नियामकीय प्रतिबंधों के कारण चयन प्रक्रिया में अपना प्रतिनिधि शामिल नहीं कर पा रहा है।

मामले से परिचित लोगों के अनुसार, एक जांच से जुड़े प्रतिबंधों के चलते एसआरटीटी फिलहाल आंतरिक बैठकें नहीं कर सकता। इसके कारण वह उस पांच सदस्यीय पैनल के लिए अपना प्रतिनिधि नामित नहीं कर पा रहा है, जिसे मौजूदा चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी की तलाश करनी है।

टाटा ट्रस्ट्स सामूहिक रूप से टाटा संस में करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं। बताया जा रहा है कि ट्रस्ट्स ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर से एसआरटीटी को पैनल में अपना प्रतिनिधि नियुक्त करने की अनुमति देने का अनुरोध किया है।

चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त को घोषणा की थी कि वह चेयरमैन के तौर पर अगले कार्यकाल के लिए दावेदारी नहीं करेंगे। उनका मौजूदा कार्यकाल अगले साल फरवरी में समाप्त होना है। उनके अचानक उत्तराधिकारी नहीं बनने के फैसले के बाद समूह में उत्तराधिकार योजना और कॉरपोरेट गवर्नेंस को लेकर सवाल उठे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस घटनाक्रम ने टाटा संस की जटिल स्वामित्व संरचना और निर्णय प्रक्रिया से जुड़ी चुनौतियों को भी सामने ला दिया है। वहीं, टाटा ट्रस्ट्स के प्रमुख नोएल टाटा और निवर्तमान चेयरमैन के बीच संभावित मतभेदों की भी चर्चा है।

यदि चयन प्रक्रिया लंबे समय तक अटकी रहती है, तो इससे निवेशकों और नियामकों के बीच समूह की शासन व्यवस्था तथा नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चिंता बढ़ सकती है। टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स ने इस मामले पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की।

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