नयी दिल्ली : देश में 150 करोड़ रुपये या उससे अधिक मूल्य की केंद्रीय क्षेत्र की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की लागत में सामूहिक रूप से 5.4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मई महीने की एक सरकारी रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) की रिपोर्ट के अनुसार, 17 केंद्रीय मंत्रालयों एवं विभागों की 1,987 चालू बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की निगरानी की गई। इन परियोजनाओं की संशोधित लागत 42.50 लाख करोड़ रुपये आंकी गई, जबकि उनकी मूल अनुमानित लागत 37.09 लाख करोड़ रुपये थी। हालांकि, रिपोर्ट में लागत वृद्धि से प्रभावित परियोजनाओं की वास्तविक संख्या का उल्लेख नहीं किया गया है।
क्या है स्थिति : इन परियोजनाओं पर अब तक 21.82 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, जो संशोधित परियोजना लागत का लगभग 51.34 प्रतिशत है।परियोजनाओं की प्रगति के संदर्भ में 817 परियोजनाओं (41 प्रतिशत) में 80 प्रतिशत से अधिक भौतिक प्रगति दर्ज की गई है, जबकि 280 परियोजनाएं (14 प्रतिशत) वित्तीय रूप से 80 प्रतिशत से अधिक पूरी हो चुकी हैं। परिवहन एवं लॉजिस्टिक क्षेत्र में सर्वाधिक 1,476 परियोजनाएं चल रही हैं, जिनकी संशोधित लागत 23.50 लाख करोड़ रुपये है। कुल 1,987 चालू बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में से 813 विशाल परियोजनाएं हैं, जिनकी लागत 1,000 करोड़ रुपये या उससे अधिक है और इनकी मूल अनुमानित लागत 31.58 लाख करोड़ रुपये है। वहीं 1,174 परियोजनाएं 150 करोड़ रुपये से अधिक तथा 1,000 करोड़ रुपये तक की लागत वाली ‘प्रमुख परियोजनाएं’ हैं, जिनकी कुल मूल लागत 5.52 लाख करोड़ रुपये है।भौतिक और वित्तीय प्रगति सामान्यतः समान गति से आगे बढ़ रही है। बड़ी संख्या में परियोजनाएं या तो शुरुआती चरण (0-20 प्रतिशत) में हैं या फिर उन्नत चरण (81-100 प्रतिशत) में पहुंच चुकी हैं, जो नई शुरू हुई परियोजनाओं और पूर्णता के करीब पहुंच चुकी परियोजनाओं के मिश्रण को दर्शाता है।
संशोधित लागत : सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के तहत सर्वाधिक 1,149 परियोजनाएं (58 प्रतिशत) क्रियान्वित की जा रही हैं। इनकी संशोधित लागत 10.95 लाख करोड़ रुपये है, जो कुल संशोधित परियोजना लागत का 26 प्रतिशत है। रेल मंत्रालय 261 परियोजनाओं का क्रियान्वयन कर रहा है, जिनकी संशोधित लागत 8.79 लाख करोड़ रुपये है। वहीं कोयला मंत्रालय के तहत 121 परियोजनाएं चल रही हैं, जिनकी संशोधित लागत 2.23 लाख करोड़ रुपये है।