नयी दिल्ली : केंद्र के प्रस्तावित दो स्लैब वाले जीएसटी से राजस्व पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंताओं के बीच सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया कि केंद्र राज्यों के साथ राजस्व बंटवारे में समान भागीदार है। अगली पीढ़ी का जीएसटी मध्यम वर्ग का समर्थन करता है और खपत बढ़ने के कारण इससे समय के साथ राजस्व बढ़ने की उम्मीद है। एक अन्य सूत्र ने कहा कि गणना से पता चलता है कि नए दो स्तरीय स्लैब के लागू होने के बाद जीएसटी राजस्व में लगातार वृद्धि होगी। दूसरे सूत्र ने कहा, ‘‘जून, 2022 में क्षतिपूर्ति उपकर अवधि खत्म होने पर भी इसी तरह की राजस्व चिंताएं जताई गई थीं। लेकिन समय के साथ जीएसटी राजस्व में सुधार हुआ है, और राज्यों को मिलने वाला कर बढ़ा है।’’ उन्होंने कहा कि केंद्र द्वारा प्रस्तावित जीएसटी सुधारों के साथ कर वृद्धि में लगातार सुधार होगा।
क्या है स्थिति : इस समय जीएसटी ढांचे के तहत राजस्व केंद्र और राज्यों के बीच समान रूप से साझा किया जाता है। इसके अतिरिक्त, वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार विभाज्य कर पूल में केंद्र के हिस्से का 41 प्रतिशत राज्यों को आवंटित किया जाता है। एक सरकारी सूत्र ने कहा, ‘‘जीएसटी में क्या संग्रह हो रहा है और क्या संग्रह होगा, इस पर केंद्र की समान चिंताएं हैं। जीएसटी परिषद का सदस्य होने के नाते केंद्र और राज्य, दोनों समान भागीदार हैं। ऐसी स्थिति में क्या यह उम्मीद करना उचित है कि भारत सरकार राज्यों को क्षतिपूर्ति करेगी?’ इस समय जीएसटी एक चार स्तरीय संरचना है, जिसमें कर की दरें पांच प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत हैं। खाद्य और आवश्यक वस्तुओं पर या तो शून्य या पांच प्रतिशत की दर से कर लगाया जाता है, और विलासिता तथा अहितकर वस्तुओं पर 28 प्रतिशत की दर से कर लगाया जाता है।
कितनी है हिस्सेदारी : कुल जीएसटी राजस्व में पांच प्रतिशत स्लैब की सात प्रतिशत हिस्सेदारी है। दूसरी ओर 12 प्रतिशत स्लैब की पांच प्रतिशत, 18 प्रतिशत स्लैब की 65 प्रतिशत और 28 प्रतिशत स्लैब की 11 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इस समय राज्यों के पास भूमि और पेट्रोलियम उत्पादों पर विशेष कराधान अधिकार हैं। इसके अलावा, केंद्र एक विशेष सहायता योजना के तहत राज्यों को पूंजीगत व्यय के लिए 50 साल का ब्याज मुक्त ऋण दे रहा है।