टाटा संस के चेयरमैन बने रहेंगे चंद्रशेखरन, तीसरे कार्यकाल पर बोर्ड की मुहर 
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टाटा संस के चेयरमैन बने रहेंगे चंद्रशेखरन, तीसरे कार्यकाल पर बोर्ड की मुहर

टाटा संस बोर्ड ने एन चंद्रशेखरन को तीसरे कार्यकाल के लिए चेयरमैन बनाए रखने का फैसला किया, नेतृत्व में निरंतरता से संभावित निवेशकों के भरोसे और कंपनी की शेयर बाजार में सूचीबद्धता की संभावनाएं मजबूत होने की उम्मीद

Goutam Ojha

मुंबई : टाटा संस के निदेशक मंडल ने एन चंद्रशेखरन को पांच साल के तीसरे कार्यकाल के लिए चेयरमैन नियुक्त करने का फैसला किया है। सूत्रों के मुताबिक, बृहस्पतिवार को हुई बोर्ड बैठक में यह प्रस्ताव बहुमत से पारित हुआ। हालांकि, चंद्रशेखरन ने कुछ सप्ताह पहले ही बोर्ड को बताया था कि वह अपना दूसरा कार्यकाल पूरा होने के बाद पद पर बने रहने के इच्छुक नहीं हैं।

यह फैसला भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा 11 सितंबर को टाटा संस का गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) पंजीकरण समाप्त करने का आवेदन खारिज किए जाने के बाद आया है। इससे कंपनी की शेयर बाजार में सूचीबद्धता की संभावना फिर बढ़ गई है।

सूत्रों के अनुसार, निदेशक मंडल का मानना है कि नेतृत्व में निरंतरता से संभावित निवेशकों को भरोसा मिलेगा। कंपनी की नामांकन एवं पारिश्रमिक समिति चंद्रशेखरन से अगस्त में बोर्ड को बताए गए अपने फैसले पर पुनर्विचार करने को कहेगी। उस समय नियामकीय स्थिति अलग थी।

टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा ने पुनर्नियुक्ति प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया, लेकिन यह बहुमत से पारित हो गया। नोएल टाटा की अगुवाई वाले टाटा ट्रस्ट और संबद्ध ट्रस्टों के पास टाटा संस की करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है। वहीं, करीब 18 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला शापूरजी पालोनजी समूह कंपनी की सूचीबद्धता का समर्थक है।

टाटा संस और टाटा ट्रस्ट ने बैठक के फैसलों पर टिप्पणी नहीं की है। पुनर्नियुक्ति के बाद सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट की ओर से शुरू की गई चेयरमैन चयन प्रक्रिया रोकने या बंद करने की संभावना है।

सूचीबद्धता पर नियामकीय दबाव

आरबीआई ने सितंबर 2022 में टाटा संस को ‘अपर लेयर’ एनबीएफसी के रूप में वर्गीकृत किया था। इस श्रेणी की कंपनियों को तीन साल के भीतर शेयर बाजार में सूचीबद्ध होना होता है। यह समयसीमा सितंबर 2025 में समाप्त हो गई थी। टाटा संस ने इस नियम से छूट पाने के लिए पंजीकरण से बाहर निकलने का आवेदन किया था, जिसे आरबीआई ने खारिज कर दिया।

टाटा संस पिछले एक साल से अधिक समय से सूचीबद्धता से बचने की कोशिश कर रही थी और इस दौरान 21,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज चुका चुकी है।

मतभेद और उत्तराधिकारी की चर्चा

चंद्रशेखरन 2017 से टाटा संस का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने साइरस मिस्त्री को पद से हटाए जाने के बाद अंतरिम चेयरमैन बने रतन टाटा का स्थान लिया था। 2022 में उन्हें दूसरे कार्यकाल के लिए फिर नियुक्त किया गया।

अगस्त में पद छोड़ने की योजना बताने से पहले सूचीबद्धता और एयर इंडिया, टाटा डिजिटल तथा बिगबास्केट जैसे कारोबारों में पूंजी आवंटन को लेकर चंद्रशेखरन और नोएल टाटा के बीच मतभेद सामने आए थे। इनमें से कुछ कारोबार घाटे में रहे हैं।

इससे पहले बोर्ड ने उनके तीसरे कार्यकाल पर फैसला टाल दिया था। बॉम्बे हाउस में करीब तीन घंटे चली बैठक के दौरान नोएल टाटा ने सूचीबद्धता और पूंजी आवंटन को लेकर चिंताएं जताई थीं।

चंद्रशेखरन के संभावित उत्तराधिकारी के तौर पर टाटा स्टील के सीईओ टीवी नरेंद्रन, टाटा संस के समूह मुख्य वित्त अधिकारी सौरभ अग्रवाल और एनएसई के सीईओ आशीष कुमार चौहान के नामों पर विचार किए जाने की खबरें थीं।

संभावित बड़ा आईपीओ

टाटा संस की संभावित सूचीबद्धता भारत के बड़े सार्वजनिक निर्गमों में से एक हो सकती है। कंपनी की केवल एक प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने से भी 15,000 से 20,000 करोड़ रुपये जुटाए जा सकते हैं। इससे कंपनी का कुल मूल्यांकन करीब 20 लाख करोड़ रुपये बैठता है।

टाटा संस की टाटा समूह की इस्पात, वाहन, सूचना प्रौद्योगिकी, होटल और विमानन समेत विभिन्न क्षेत्रों की कंपनियों में नियंत्रक हिस्सेदारी है।

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