चांदी के भाव में इन दिनों बड़ी हलचल है। हाल की गिरावट के बाद बाजार में इसकी कीमत को लेकर चर्चा फिर तेज है। लेकिन चांदी की कहानी सिर्फ सोने की तरह खरीदने-बेचने तक सीमित नहीं है। इसकी खासियत यह है कि यह एक कीमती धातु होने के साथ-साथ बेहद उपयोगी औद्योगिक धातु भी है।
चांदी बिजली की बेहतरीन चालक है और इसी वजह से इसका इस्तेमाल इलेक्ट्रिकल कॉन्टैक्ट, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और सोलर तकनीक में होता है। वैज्ञानिक शोध में भी इसकी उच्च विद्युत चालकता को इसकी प्रमुख खूबियों में गिना गया है।
आपके घर की दीवार पर लगा सामान्य स्विच भले प्लास्टिक का दिखाई देता हो, लेकिन उसके अंदर मौजूद इलेक्ट्रिकल कॉन्टैक्ट अलग कहानी बताते हैं।
स्विच, रिले और दूसरे इलेक्ट्रिकल उपकरणों में ऐसे कॉन्टैक्ट इस्तेमाल होते हैं जिनका काम बिजली के प्रवाह को जोड़ना या रोकना होता है। सिल्वर और सिल्वर-आधारित मिश्र धातुओं का इस्तेमाल इन कॉन्टैक्ट में किया जाता है क्योंकि चांदी की विद्युत चालकता बहुत अधिक है। शोध में सिल्वर-आधारित इलेक्ट्रिकल कॉन्टैक्ट को घरेलू और औद्योगिक स्विचिंग एप्लिकेशन से जोड़ा गया है। यानी घर में चांदी देखने के लिए हमेशा गहनों का डिब्बा खोलना जरूरी नहीं है।
अगर आपके घर की छत पर सोलर पैनल लगा है, तो वहां भी चांदी की भूमिका हो सकती है।सोलर सेल में चांदी से बनी एक विशेष परत का इस्तेमाल बिजली को आगे पहुंचाने के लिए किया जाता है। सूरज की रोशनी सोलर सेल पर पड़ने के बाद बिजली पैदा होती है और चांदी उस बिजली को आगे ले जाने में मदद करती है।
दुनिया में सोलर ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ने के साथ इस क्षेत्र में चांदी की मांग भी लंबे समय तक बढ़ी है। 2024 में सोलर तकनीक से जुड़ी चांदी की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची थी। हालांकि चांदी महंगी होने के कारण सोलर कंपनियां अब कम चांदी इस्तेमाल करने और कुछ जगहों पर तांबे जैसे विकल्पों को अपनाने पर भी काम कर रही हैं। यानी सोलर पैनल के लिए चांदी जरूरी जरूर है, लेकिन उद्योग लगातार यह भी कोशिश कर रहा है कि कम से कम चांदी में वही काम किया जा सके।
आज की कारें सिर्फ इंजन और पहियों तक सीमित नहीं हैं। इनमें सेंसर, स्क्रीन, सुरक्षा प्रणालियां और कई तरह के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण होते हैं। इन सभी के लिए बिजली का भरोसेमंद प्रवाह जरूरी है। इसी वजह से वाहनों में इस्तेमाल होने वाले कुछ बिजली से जुड़े हिस्सों में चांदी की भूमिका होती है। EV के बढ़ते इस्तेमाल और वाहनों में बढ़ती इलेक्ट्रॉनिक तकनीक के साथ इस क्षेत्र में भी चांदी की उपयोगिता बनी हुई है। यानी जिस कार को आप सड़क पर चलते देखते हैं, उसकी तकनीकी व्यवस्था में भी चांदी का एक छोटा-सा हिस्सा हो सकता है।
चांदी का इस्तेमाल केवल मोबाइल फोन तक सीमित नहीं है। कंप्यूटर, टीवी, माइक्रोवेव, कीबोर्ड और कई दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में भी चांदी का इस्तेमाल होता है। कुछ उपकरणों में चांदी से बनी स्याही या बेहद पतली परतों का इस्तेमाल किया जाता है, जो बिजली को एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक पहुंचाने में मदद करती हैं। इसी तरह कुछ पहचान तकनीक और बिना तार के सिग्नल भेजने वाली प्रणालियों में भी चांदी का इस्तेमाल किया जाता है।
चांदी की मांग को समझने के लिए सिर्फ गहनों और निवेश पर नजर डालना काफी नहीं है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर ऊर्जा, वाहन, बिजली का ढांचा और दूसरी औद्योगिक जरूरतें भी इसकी मांग को प्रभावित करती हैं।
2024 में दुनिया में चांदी की औद्योगिक मांग 680.5 मिलियन औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची थी। इसमें इलेक्ट्रॉनिक्स और बिजली से जुड़े इस्तेमाल के अलावा सोलर ऊर्जा, वाहनों और बिजली के बुनियादी ढांचे की मांग का भी योगदान रहा।
हालांकि 2025 में औद्योगिक मांग घटकर 657.4 मिलियन औंस रही। सोलर क्षेत्र में चांदी की मात्रा कम करने और कुछ जगहों पर दूसरे विकल्पों के इस्तेमाल का असर भी इस बदलाव में दिखा। इसके बावजूद इलेक्ट्रॉनिक्स, वाहन, बिजली के ढांचे और नई तकनीक से जुड़ी जरूरतें चांदी के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई हैं।
चांदी की एक और खासियत है—इसमें कुछ कीटाणुओं को रोकने की क्षमता होती है। इसी कारण चांदी का इस्तेमाल कुछ चिकित्सा उपकरणों, विशेष सामग्री और संक्रमण से बचाव से जुड़े उत्पादों में किया जाता है।
हालांकि यहां एक बात समझना जरूरी है। इसका मतलब यह नहीं कि घर में रखी हर मेडिकल चीज में चांदी होती है। इसका इस्तेमाल खास जरूरत वाले कुछ उत्पादों और चिकित्सा तकनीकों में किया जाता है।