मुंबई : भारत में पूंजी बाजार घरेलू बचत और संपत्ति सृजन का प्रमुख माध्यम बनते जा रहे हैं। यह इस बात का संकेत है कि निवेश के तरीकों में एक संरचनात्मक बदलाव आया है और लोग तेजी से बाजार आधारित विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं। ‘आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज इंडिया इन्वेस्टर कॉन्फ्रेंस 2026’ में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने यह बात कही। पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) के नियमों पर उन्होंने संकेत दिया कि इस पर व्यापक विचार-विमर्श जारी है और जल्द ही एक परामर्श पत्र जारी किया जाएगा। भारत की आर्थिक प्रगति केवल ऊंची वृद्धि दर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें अर्थव्यवस्था का औपचारिककरण, बचत का वित्तीयकरण और संस्थानों पर बढ़ता भरोसा भी शामिल है।
क्या है स्थिति : भारतीय बाजारों की गहराई बढ़ रही है। अब देश में प्रतिभूति बाजार में लगभग 14.5 करोड़ निवेशक हैं। इनकी संख्या हर साल 20 प्रतिशत से अधिक की दर से बढ़ रही है। सेबी प्रमुख ने बताया कि म्यूचुअल फंड संपत्ति लगभग 12 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 80 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गई है, जबकि पूंजी बाजार में घरेलू भागीदारी लगातार बढ़ रही है। सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में घरेलू वित्तीय बचत का हिस्सा वित्त वर्ष 2022-23 के लगभग 20 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 21.7 प्रतिशत हो गया है, जो विभिन्न वित्तीय साधनों में व्यापक भागीदारी के कारण संभव हुआ है।
स्पष्ट बदलाव : ये सभी घटनाक्रम एक स्पष्ट बदलाव की ओर इशारा करते हैं और अब घरेलू बचत का बड़ा हिस्सा बाजार-आधारित निवेश विकल्पों में जा रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में इक्विटी निर्गम 4.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि 366 IPO के जरिये लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपये जुटाए गए। कॉरपोरेट बॉन्ड निर्गम नौ लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा, जो पूंजी निर्माण में बाजारों की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। बाजार पूंजीकरण GDP के लगभग 69 प्रतिशत (एक दशक पहले) से बढ़कर अब करीब 128 प्रतिशत हो गया है।
निवेशकों का भरोसा : पांडेय ने कहा कि हर नियामकीय सुधार और बाजार पहल का अंतिम उद्देश्य निवेशकों का भरोसा मजबूत करना होना चाहिए। यदि निवेशक को सूचित, संरक्षित तथा निष्पक्ष व्यवहार का अनुभव होता है तो विश्वास बढ़ेगा, भागीदारी गहरी होगी और बाजार एक मजबूत एवं टिकाऊ आधार पर लगातार बढ़ते रहेंगे।