मुंबई : केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकों से मानक ऋण उत्पादों से आगे बढ़कर ऐसे कर्ज विकल्प विकसित करने का आग्रह किया जिनकी अदायगी संबंधित कारोबार की जरूरतों एवं आय चक्र के अनुरूप हो। भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) के 37वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में सीतारमण ने कहा कि गैर-मानक कारोबार के लिए एक ही तरह के ऋण उत्पाद उपयुक्त नहीं हो सकते हैं और इस दिशा में सिडबी जैसे संस्थान अग्रणी भूमिका निभा सकते हैं। मानक ऋण उत्पाद गैर-मानक कारोबार के लिए काम नहीं कर सकते।
एक समान पुनर्भुगतान संरचना उचित नहीं : विभिन्न व्यवसायों की आय अलग-अलग समय और तरीके से होती है, जबकि अभी कर्ज की अदायगी आम तौर पर मासिक आधार पर तय होती है। वित्त मंत्री ने कहा, कृषि से जुड़े उद्यमों की आय हर महीने नहीं होती, पर्यटन क्षेत्र में कमाई कुछ महीनों में केंद्रित रहती है, जबकि निर्यातकों को भुगतान में समय लगता है। ऐसे में सभी के लिए एक समान पुनर्भुगतान संरचना रखना उचित नहीं है।
सुझाव दिया : उन्होंने सुझाव दिया कि नासिक, सतारा और सांगली जैसे क्षेत्रों में स्थित कृषि प्रसंस्करण इकाइयों के लिए कर्ज अदायगी को फसल चक्र से जोड़ा जा सकता है। वहीं, महाबलेश्वर, माथेरान और लोनावला जैसे पर्यटन स्थलों में ऋण भुगतान को मौसमी आय के अनुरूप तय किया जाना चाहिए। इसी तर्ज पर कपड़ा और परिधान इकाइयों के लिए निर्यात चक्र को ध्यान में रखते हुए निर्यात-पूर्व एवं निर्यात-पश्चात वित्त के साथ मुद्रा जोखिम से सुरक्षा भी दी जानी चाहिए। सही उद्यम को सही समय पर और सही उद्देश्य के लिए सही ऋण उपलब्ध कराना होना चाहिए।
कैसी हो भूमिका : उन्होंने सिडबी से केवल ऋणदाता के बजाय छोटे उद्यमों के लिए ‘बाजार निर्माता’ एवं जोखिम-साझेदार की भूमिका निभाने और स्टार्टअप कंपनियों की ऋण पूंजी जरूरतों को पूरा करने को भी कहा। वित्त मंत्री ने कहा कि देश में लगभग 32 करोड़ लोग एमएसएमई क्षेत्र में कार्यरत हैं और इस क्षेत्र को सही कर्ज उपलब्ध कराने से व्यापक आर्थिक प्रभाव पड़ सकता है।