नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने चारा घोटाले के एक मामले में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव को जमानत देने संबंधी झारखंड हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।
न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी बी वराले की पीठ ने हाईकोर्ट से कहा कि वह इस मामले में लंबित अपीलों पर सुनवाई में तेजी लाएं और संभव हो तो छह महीने के अंदर उन पर फैसला करे।
शीर्ष अदालत हाईकोर्ट के जुलाई 2019 के आदेश को चुनौती देने वाली केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने कहा, हम इस विवादित आदेश में हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं हैं।
CBI ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए कहा था कि अदालत ने ‘गलत तरीके से’ अधीनस्थ अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को निलंबित कर दिया और चारा घोटाले के एक मामले में राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख को जमानत पर रिहा कर दिया।
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री यादव को देवघर कोषागार से जुड़े मामले में दोषी ठहराया गया था जिसमें 89 लाख रुपये के गबन का आरोप था। CBI की विशेष अदालत ने यादव को दोषी ठहराते हुए साढ़े तीन साल की जेल की सजा सुनाई थी।
देवघर कोषागार से कथित रूप से धोखाधड़ी के जरिए 89.27 लाख रुपये निकालने के मामले में यादव की सजा निलंबित करते हुए और उन्हें जमानत देते हुए हाईकोर्ट ने कहा था कि उन्होंने अपनी सजा का आधा हिस्सा पूरा कर लिया है।