बिहार विधान परिषद की 10 सीटों पर निर्विरोध चुनाव, निशांत कुमार की चुप्पी बनी चर्चा का विषय 
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बिहार विधान परिषद की 10 सीटों पर निर्विरोध चुनाव, निशांत और पवन सिंह समेत सभी उम्मीदवार विजयी

जदयू-भाजपा के प्रमुख चेहरे विधान परिषद तक पहुंचे, सुनील सिंह ने जीत को लालू यादव के जन्मदिन का ‘तोहफा’ बताया, निशांत कुमार की चुप्पी और नए राजनीतिक समीकरणों पर शुरू हुई चर्चा

बिहार विधान परिषद की 10 सीटों के लिए हुए द्विवार्षिक चुनाव और उपचुनाव में सभी उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिए गए हैं। नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव मैदान में उतरे सभी 10 प्रत्याशियों की जीत तय हो गई। गुरुवार को नवनिर्वाचित सदस्य विधानसभा पहुंचकर अपना निर्वाचन प्रमाण-पत्र प्राप्त करते नजर आए।

इस चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने नौ सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि एक सीट पर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के उम्मीदवार निर्वाचित हुए।

कौन-कौन बने विधान परिषद सदस्य?

इस चुनाव में निर्विरोध जीत हासिल करने वाले उम्मीदवारों में कई चर्चित चेहरे शामिल हैं।

इनमें जदयू से Nishant Kumar, Bharti Mehta, Shivrani Devi Prajapati और Lalan Prasad तो भाजपा से Pawan Singh, Sanjay Prakash Mayukh, Anil Thakur, Sheela Pandit के अलावा अन्य दलों से Ashraf Ansari और Sunil Kumar Singh शामिल हैं।

प्रमाण-पत्र लेने पहुंचे उम्मीदवार, दिखा जीत का उत्साह

विधानसभा परिसर में प्रमाण-पत्र लेने पहुंचे उम्मीदवारों में उत्साह साफ दिखाई दिया। राजद के Sunil Kumar Singh और लोजपा (रामविलास) के Ashraf Ansari ने समर्थकों का अभिवादन करते हुए विक्ट्री साइन दिखाया और अपनी जीत पर खुशी जताई।

लालू यादव के जन्मदिन पर मिला ‘तोहफा’

राजद उम्मीदवार सुनील कुमार सिंह ने अपनी जीत को पार्टी के लिए खास बताया। उन्होंने कहा कि जिस दिन उन्हें विधान परिषद सदस्यता का प्रमाण-पत्र मिला, उसी दिन राजद प्रमुख Lalu Prasad Yadav का जन्मदिन भी है।

उन्होंने अपनी जीत को लालू प्रसाद यादव और Tejashwi Yadav के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं की मेहनत का परिणाम बताते हुए उनका आभार जताया।

निशांत कुमार की चुप्पी बनी चर्चा का विषय

चुनाव परिणाम के बाद सबसे अधिक चर्चा जदयू उम्मीदवार Nishant Kumar को लेकर रही। प्रमाण-पत्र लेने पहुंचे निशांत कुमार से जब पत्रकारों ने उनके राजनीतिक भविष्य और नई भूमिका को लेकर सवाल पूछे, तो उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

बिना कुछ बोले सीधे आगे बढ़ जाने की उनकी शैली राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई।

मतदान की नौबत क्यों नहीं आई?

विधान परिषद की नौ नियमित सीटों और एक उपचुनाव सीट के लिए कुल 10 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था। नामांकन पत्रों की जांच में सभी उम्मीदवारों के दस्तावेज वैध पाए गए।

चूंकि उपलब्ध सीटों और उम्मीदवारों की संख्या बराबर थी, इसलिए चुनाव आयोग को मतदान कराने की आवश्यकता नहीं पड़ी और सभी प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिए गए।

बिहार की राजनीति में नए समीकरणों के संकेत

विधान परिषद चुनाव भले ही निर्विरोध संपन्न हो गया हो, लेकिन इसके नतीजों ने कई राजनीतिक संकेत भी दिए हैं। एक ओर जदयू और भाजपा ने अपने प्रमुख चेहरों को सदन तक पहुंचाने में सफलता हासिल की है, वहीं दीपक प्रकाश का चुनावी दौड़ से बाहर रह जाना आगामी दिनों में बिहार की सत्ता और गठबंधन राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे सकता है।

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