पटना : राष्ट्रीय जनता दल (राजद) अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल (जेजेडी) के प्रमुख तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी को लेकर बिहार की राजनीति गरमा गई है। विपक्षी नेताओं ने इस कार्रवाई को लेकर राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर सवाल उठाए हैं।
राजद नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी की कड़ी आलोचना करते हुए उनकी तत्काल रिहाई की मांग की। उन्होंने कहा कि पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन करने वाले छात्रों ने अपने अधिकारों और बेहतर भविष्य के लिए आवाज उठाई है, जिसका विपक्षी दलों ने समर्थन किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने आंदोलन में शामिल सैकड़ों छात्र-छात्राओं पर गंभीर धाराओं में मामले दर्ज कर उन्हें हिरासत में लिया है। तेजस्वी यादव ने कहा कि जब सरकार की ओर से आंदोलन समाप्त होने के बाद मामलों को वापस लेने की बात कही जा चुकी है, तब भी लोगों को जेल भेजा जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के कई विधायकों को भी हिरासत में लिया गया है और उनके भाई तेज प्रताप यादव को भी गिरफ्तार किया गया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सभी आंदोलनकारियों को जल्द रिहा नहीं किया गया और मुकदमे वापस नहीं लिए गए तो विपक्ष बड़ा आंदोलन करेगा।
वहीं, 'जन सुराज' के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भी तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि तेज प्रताप यादव ने एक दिन पहले ही उन्हें समर्थन देने की घोषणा की थी और इसके कुछ घंटों बाद देर रात उन्हें गिरफ्तार कर बेऊर जेल भेज दिया गया।
प्रशांत किशोर ने पूछा कि आखिर किस कानूनी आधार पर तेज प्रताप यादव को गिरफ्तार किया गया प्रशासन को इस संबंध में सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
गौरतलब है कि छात्रों के आंदोलन के समर्थन और बिहार बंद के दौरान कथित उपद्रव के मामले में पटना पुलिस ने शनिवार को तेज प्रताप यादव को गिरफ्तार किया था।
गिरफ्तारी के बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में बेऊर केंद्रीय कारागार भेज दिया। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तारी दर्ज मामलों के आधार पर की गई है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक कार्रवाई बता रहा है।