पटना : केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने शनिवार को कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रटकर परीक्षा पास करना और नौकरी पाना नहीं होना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लिए नवाचार पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया।
यहां ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत चित्रकला और राज्यस्तरीय भाषण प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित करने के लिए आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री ने बताया कि बिहार के 38 जिलों के 95,195 सरकारी और निजी विद्यालयों के विद्यार्थियों ने इन प्रतियोगिताओं में भाग लिया।
उन्होंने कहा, इन प्रतियोगिताओं में आप सभी विद्यार्थियों ने चित्रों और भाषणों के माध्यम से वर्ष 2047 के भारत को लेकर अपनी सोच व्यक्त की। आपकी कल्पनाशक्ति बहुत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 का उद्देश्य शिक्षा को केवल परीक्षा पास करने और नौकरी पाने तक सीमित रखने के बजाय विद्यार्थियों में तार्किक सोच, रचनात्मकता और सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देना है।
जोशी ने कहा, हमारा लक्ष्य किसी तरह डिग्री हासिल करना, परीक्षा पास करना और नौकरी पाना भर नहीं होना चाहिए। हमें समझना चाहिए, कल्पना करनी चाहिए और नए विचारों के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने अभिभावकों और शिक्षकों से बच्चों की रुचि और उनकी क्षमताओं को समझने की अपील की। उन्होंने कहा कि बच्चों पर किसी एक करियर को चुनने के लिए दबाव डालने के बजाय उनकी वक्तिगत रुचियों और क्षमताओं को पहचानें।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पीएम श्री स्कूल और अटल टिंकरिंग लैब जैसी पहल विद्यार्थियों के बीच शोध, प्रयोग और नवाचार का माहौल बनाने के लिए शुरू की गई हैं। उन्होंने राज्य की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के प्रयासों के लिए मौजूदा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सराहना की।
जोशी ने कहा कि भारत विनिर्माण, चिकित्सा और कौशल विकास के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित और आत्मनिर्भर भारत बनाने का लक्ष्य हासिल करने में युवाओं की अहम भूमिका होगी।