पटना : बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर महागठबंधन ने गुरुवार को पटना में विरोध मार्च किया। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के नेतृत्व में महागठबंधन के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पटना में राजभवन की ओर मार्च किया। मार्च में विकासशील इंसान पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम, राजद सांसद मीसा भारती और वाम दलों के वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
महागठबंधन ने एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। मार्च के दौरान पुलिस ने सुरक्षा के मद्देनजर कई स्थानों पर बैरिकेडिंग कर रखी थी। प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी।
महागठबंधन के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एसआईआर तथा चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी की। कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनातनी की स्थिति भी बनी। राजभवन पहुंचने के बाद महागठबंधन के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से नेताओं ने एसआईआर प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग रखी।
विपक्षी दलों का कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे सवालों का समाधान किया जाना चाहिए। राजभवन से बाहर निकलने के बाद वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी ने कहा कि महागठबंधन ने एसआईआर के विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ किया गया और 'वोट चोरी' के जरिए चुनाव को प्रभावित किया गया। मुकेश सहनी ने कहा कि महागठबंधन की मांग है कि ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा दें।
पाटलिपुत्र से राजद सांसद मीसा भारती ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता और जनप्रतिनिधियों को अपनी बात रखने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि पूरे इलाके में बैरिकेडिंग कर दी गई थी और चप्पे-चप्पे पर पुलिस प्रशासन के जवान तैनात थे।
उन्होंने दावा किया कि महागठबंधन ने शांतिपूर्ण तरीके से मार्च निकालने की अनुमति मांगी थी। वहीं, विपक्ष के प्रदर्शन को लेकर एसडीपीओ सचिवालय अनु कुमारी ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल को राज्यपाल भवन में राज्यपाल से मिलने की अनुमति दी गई थी।
बैठक के बाद प्रतिनिधिमंडल वहां से चला गया, जबकि बाकी लोगों को बैरिकेड के पीछे रोक दिया गया था। महागठबंधन की ओर से एसआईआर और चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध कार्यक्रम पहले भी आयोजित किए गए हैं। विपक्षी दलों ने इसे चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर अपना विरोध दर्ज कराने का माध्यम बताया है।