बाढ़ जैसी स्थिति 
बिहार

सारण और मुजफ्फरपुर में तटबंध टूटे; कई इलाके बाढ़ की चपेट में

गंडक के बाएं और दाएं दोनों तटबंधों पर अत्यधिक दबाव पैदा हो गया है

Santosh Sharma

पटना : नेपाल और उत्तर प्रदेश में हुई भारी बारिश के बाद गंडक नदी कई स्थानों पर अपने पिछले सर्वाधिक बाढ़ स्तर (एचएफएल) से ऊपर बह रही है, जिससे बिहार में कुछ तटबंधों पर अत्यधिक दबाव बना हुआ है।

जल संसाधन विभाग (डब्ल्यूआरडी) के अनुसार, गोपालगंज के डुमरियाघाट में पिछले लगभग 36 घंटे से गंडक नदी का जलस्तर पिछले सर्वकालिक उच्चतम बाढ़ स्तर से करीब 22 सेंटीमीटर ऊपर बना हुआ है। वहीं, सारण के रेवा घाट और वैशाली के लालगंज में जलस्तर पिछले लगभग 21घंटे से एचएफएल से करीब 22 सेंटीमीटर ऊपर बना हुआ है।

गंडक के बाएं और दाएं दोनों तटबंधों पर अत्यधिक दबाव पैदा हो गया है। इसमें कहा गया है कि बुधवार रात सारण जिले के पनापुर प्रखंड में दायां सारण तटबंध टूट गया। वहीं, मुजफ्फरपुर जिले के साहेबगंज प्रखंड में तिरहुत मुख्य तटबंध के तहत आने वाला रिंग तटबंध भी टूट गया।

बयान में कहा गया, गंगा भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जिससे गंडक में पानी का दबाव बन रहा है तथा स्थिति और गंभीर हो गई है। कई संवेदनशील स्थानों पर पानी के रिसाव की सूचना मिली है, जहां बाढ़ नियंत्रण के लिए व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं और चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है।

’ डब्ल्यूआरडी ने कहा कि हालांकि गंडक का जलस्तर अब घट रहा है, लेकिन यह पिछले उच्चतम बाढ़ स्तर से ऊपर बना हुआ है और अगले 48 घंटे तक नदी का हाइड्रोलिक दबाव बने रहने की आशंका है। विभाग ने कहा कि अन्य संवेदनशील स्थान फिलहाल सुरक्षित और नियंत्रण में हैं।

डब्ल्यूआरडी के अनुसार, बिहार की कई अन्य नदियों का जलस्तर भी बृहस्पतिवार को बढ़ता रहा। कई निगरानी केंद्रों पर बागमती, बूढ़ी गंडक और घाघरा में जलस्तर बढ़ने का रुख दर्ज किया गया। बेनीबाद में बागमती नदी का जलस्तर 50.03 मीटर पहुंच गया, जो खतरे के निशान से 1.35 मीटर ऊपर है।

वहीं, कटौझा में इसका जलस्तर घट रहा था। खगड़िया में बूढ़ी गंडक का जलस्तर 36.96 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से 0.38 मीटर ऊपर है। गंगा का जलस्तर पटना के दीघा, गांधी घाट और हथीदह तथा भागलपुर के कहलगांव में भी बढ़ रहा था। गांधी घाट पर जलस्तर 49.67 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से 1.07 मीटर ऊपर है, जबकि हथीदह में यह 42.49 मीटर रहा, जो खतरे के निशान से 0.73 मीटर अधिक है। बैराजों पर सुबह आठ बजे वाल्मीकिनगर में गंडक नदी का डिस्चार्ज 95,340 क्यूसेक रहा, जो बुधवार रात आठ बजे के 99,505 क्यूसेक से कम है।

इसी अवधि में बीरपुर में कोसी का डिस्चार्ज 67,564 क्यूसेक से घटकर 46,743 क्यूसेक हो गया, जबकि इंद्रपुरी बैराज में सोन नदी का डिस्चार्ज 1,14,000 क्यूसेक से घटकर 1,02,100 क्यूसेक हो गया। वाल्मीकिनगर में 28 सितंबर को गंडक नदी का 2026 में अब तक का सर्वाधिक बाढ़ डिस्चार्ज 5,43,500 क्यूसेक दर्ज किया गया था।

वहीं, कोसी का इस वर्ष का अधिकतम डिस्चार्ज 26 सितंबर को बीरपुर में 3,13,595 क्यूसेक दर्ज किया गया था। विभिन्न नदियों के जलस्तर में वृद्धि के कारण कई जिलों के निचले इलाकों में बाढ़ का असर पड़ा है। प्रभावित जिलों में पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, पूर्वी और पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज, सुपौल, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अरवल शामिल हैं।

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