पटना : राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के संस्थापक लालू प्रसाद के छोटे बेटे तेजस्वी यादव को रविवार को यहां हुई पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया। इस घटनाक्रम से उत्तराधिकार क्रम में उनकी स्थिति पर मुहर लग गई है।
हाल में हुए विधानसभा चुनाव में राजद की करारी हार हुई थी, जिसमें ‘महागठबंधन’ ने 36 वर्षीय नेता तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश करके चुनाव लड़ा था। RJD ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि यह निर्णय पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में लिया गया, जिसमें यादव, प्रसाद और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
यादव की सबसे बड़ी बहन एवं पाटलिपुत्र से सांसद मीसा भारती भी बैठक में मौजूद थीं। बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी वर्तमान में बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं।
RJD के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव अब्दुल बारी सिद्दीकी ने कहा, यह निर्णय स्पष्ट रूप से लालू प्रसाद की पूर्ण सहमति से लिया गया है, जिनकी सहमति के बिना पार्टी में कोई निर्णय नहीं लिया जा सकता। यह सर्वसम्मत निर्णय है।
सिद्दीकी ने कहा, लालू प्रसाद जी, जिन्होंने बिहार के कोने-कोने का दौरा करके पार्टी को पोषित किया, अब वृद्धावस्था और खराब स्वास्थ्य के कारण ऐसा करने में असमर्थ हैं। इसलिए, भले ही वह (लालू) राष्ट्रीय अध्यक्ष बने रहेंगे, लेकिन अब राज्य के भीतर और राज्य के बाहर पार्टी के आधार का विस्तार करना तेजस्वी यादव की जिम्मेदारी होगी।
हाल में हुए राज्य विधानसभा चुनाव में राजद को 243 सदस्यीय सदन में केवल 25 सीट पर जीत मिली थी। पिछले विधानसभा चुनाव में महागठबंधन के ‘मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार’ यादव ने राजद उम्मीदवारों को टिकट देने और कांग्रेस एवं वाम दलों समेत गठबंधन सहयोगियों के साथ सीट बंटवारे की व्यवस्था तय करने में अहम भूमिका निभाई थी।
यादव ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक को संबोधित करते हुए कार्यकर्ताओं से सकारात्मक पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करने पर जोर दिया और कहा, हमारे गठबंधन को चुनाव में 1.90 करोड़ वोट मिले थे। RJD के इतिहास में पहले कभी भी लोगों ने हमारे नेतृत्व वाले गठबंधन को इतने वोट नहीं दिये हैं।
JD(U) के प्रमुख एवं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए राजद नेता ने कहा, वह कुछ साल पहले तक हमारे साथ थे और ‘इंडिया’ गठबंधन की अवधारणा बिहार की धरती पर ही बनी थी, जहां देशभर के नेताओं ने BJP को हराने के लिए अपने मतभेदों को भुलाने पर सहमति जताई थी।
यादव ने दावा किया, अगर चाचा (नीतीश) ने लोकसभा चुनाव से ठीक पहले अपना रुख नहीं बदला होता और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में वापस नहीं लौटे होते, तो भाजपा के नेतृत्व वाला गठबंधन बहुमत हासिल नहीं कर पाता और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को केंद्र में एक और कार्यकाल नहीं मिल पाता।
उन्होंने कहा, आज राजनीति में आपके पास दो ही विकल्प बचे हैं। या तो आप नरेन्द्र मोदी से लड़ें, या उनके चरणों में नतमस्तक हो जाएं। मेरा रास्ता साफ है, क्योंकि लालू जी का खून मेरी रगों में बहता है। चाचा ने मोदी के सामने झुकना चुना है, और आप सभी ने उनकी तस्वीरें देखी होंगी।
यादव ने अपनी बड़ी बहन रोहिणी आचार्य पर भी परोक्ष रूप से निशाना साधा, जो RJD की चुनावी हार के लिए उन्हें और राज्यसभा सदस्य संजय यादव समेत उनके करीबी सहयोगियों को दोषी ठहरा रही हैं।
रोहिणी ने आरोप लगाया था कि जब उन्होंने जवाबदेही तय करने पर जोर दिया, तो उन्हें गालियां दी गईं।
यादव ने कहा, ऐसे कई लोग हैं, जिन्होंने पार्टी के कल्याण में कोई योगदान नहीं दिया। लेकिन उनकी महत्वाकांक्षाएं बहुत हैं और वे एसआईआर के तुरंत बाद हुए चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन का अपना विश्लेषण करने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, फिर भी, तेजस्वी उन सभी लोगों को साथ लेकर चलने के इच्छुक हैं, जो पार्टी को लेकर प्रतिबद्ध हैं और संगठन में नयी ताकत का संचार करना चाहते हैं। सिद्दीकी जी ने दो प्रसिद्ध गीतों, ‘हम होंगे कामयाब एक दिन’ और ‘छोड़ो कल की बातें, कल की बात पुरानी, नये दौर में लिखेंगे मिलकर नयी कहानी’ को बहुत ही सटीक ढंग से गाया है।’
यादव के बड़े भाई तेज प्रताप यादव को लालू प्रसाद ने पिछले साल पार्टी से निष्कासित कर दिया था। इसके बाद तेज प्रताप ने अपना खुद का संगठन, जनशक्ति जनता दल बनाया है, जो अभी तक कोई खास प्रभाव नहीं छोड़ पाया है।