बिहार

बिहार : बलिराजगढ़ उत्खनन में बौद्धकालीन मिथिला नगर के अवशेष मिलने के संकेत

पुरातत्वविदों ने पुरावशेषों और नगरीय सभ्यता के साक्ष्यों का अध्ययन किया

Santosh Sharma

पटना : बिहार के मधुबनी जिले के बलिराजगढ़ में चल रहे पुरातात्विक उत्खनन के दौरान बौद्धकालीन मिथिला नगर के अवशेष मिलने की संभावना जताई जा रही है। पुरातत्वविदों ने गुरुवार को उत्खनन स्थल का निरीक्षण कर वहां मिले पुरावशेषों और नगरीय सभ्यता के साक्ष्यों का अध्ययन किया।

भारतीय राष्ट्रीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत न्यास (इन्टैक) की बिहार इकाई के सह-संयोजक डॉ. शिव कुमार मिश्र ने यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि बौद्ध साहित्य ‘महाउम्मग्ग जातक’ में मिथिला नगर का उल्लेख मिलता है। इसमें वर्णन है कि नगर के चारों ओर चार प्रवेश द्वार थे, जहां बाजार स्थित थे और जिन्हें ‘यवमज्झक’ कहा जाता था। नगर के चारों प्रवेश द्वारों तथा मध्य भाग में पांच भिक्षागृह बनाए गए थे।

डॉ. मिश्र ने बताया कि राजा ऊपरी महल में निवास करते थे, जिसमें पूर्व दिशा से हवा आने के लिए खिड़कियां बनाई गई थीं।

उनके अनुसार, उत्खनन में दूसरी शताब्दी के पुरावशेष और विकसित नगरीय सभ्यता के प्रमाण लगातार मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि दरभंगा जिले के कोठराडीह और बलिराजगढ़ से शुंगकालीन ‘रिंग वेल’ भी प्राप्त हुए हैं।

उन्होंने कहा कि बलिराजगढ़ के चारों प्रवेश द्वारों और पूरे पुरास्थल का व्यापक उत्खनन आवश्यक है, जिसके बाद ही किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकेगा।

उल्लेखनीय है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI), भोपाल के वरिष्ठ पुरातत्वविद डॉ. जलज कुमार तिवारी के नेतृत्व में नालंदा अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं का एक दल भी बलिराजगढ़ में चल रहे उत्खनन कार्य का अवलोकन करने पहुंचा।

इस दौरान डॉ. तिवारी ने विद्यार्थियों को पुरातात्विक उत्खनन की व्यावहारिक बारीकियों की जानकारी दी। उन्होंने उत्खनन के दौरान प्रलेखन, फोटोग्राफी, माप, परत निर्धारण तथा पुरावशेषों के संरक्षण और रखरखाव की प्रक्रियाओं पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही, छात्र-छात्राओं के प्रश्नों के उत्तर भी दिए।

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