बंगाल

दुर्गापूजा पर तीन दिवसीय मेगा इवेंट

पीएम के आने से होगा और खास

सबिता, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : राज्य में नई सरकार के 100 दिन पूरे हो चुके हैं। इन 100 दिनों में पर्यटन विभाग की ओर से किए गए उल्लेखनीय कार्यों और आने वाले दिनों की योजनाओं की जानकारी राज्य के पर्यटन मंत्री शंकर घोष ने मंगलवार को संवाददाता सम्मेलन में दी। इस दौरान पर्यटन राज्य मंत्री पूर्णिमा चक्रवर्ती भी मौजूद थीं। शंकर घोष ने कहा कि बंगाल के पर्यटन को विश्वस्तरीय पहचान दिलाना सरकार का प्रमुख लक्ष्य है। इसके लिए दुर्गापूजा को सबसे बेहतर अवसर मानते हुए कल्चरल हेरिटेज मेगा इवेंट को तीन दिनों तक आयोजित करने की योजना है। मंत्री ने कहा कि सीएम शुभेंदु अधिकारी के आशीर्वाद से इस आयोजन की शुरुआत महालया से करने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, “हमारी दिल से इच्छा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस आयोजन में आएं।”

पर्यटन मंत्री ने आने वाले दिनों में पर्यटन क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कदम उठाने की जानकारी दी। इनमें ढाकी और प्रसिद्ध छउ और ज्यादा बढ़ावा देना सहित कई कदम शामिल है। इसके साथ ही पर्यटन विभाग की नई वेबसाइट शुरू करना, नया लोगो जारी करना, टूरिज्म में कर्मचारियों के लिए ड्रेस कोड और पारंपरिक परिधान को बढ़ावा देना शामिल है। वहीं पर्यटकों की सुविधा के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया जायेगा।

ममता बनर्जी के शासनकाल में चाय बागानों की जमीन के हस्तांतरण की जांच की मांग

तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल में उत्तर बंगाल के कई चाय बागानों की जमीन कथित तौर पर अवैध तरीके से बेचे जाने का आरोप पर्यटन मंत्री शंकर घोष ने लगाया है। उनका आरोप है कि अवैध रूप से जमीन बेचकर प्राप्त धन तृणमूल कांग्रेस के पार्टी फंड में गया। उन्होंने कहा, “उस पैसे का इस्तेमाल तृणमूल के चुनावी कार्यों में किया गया।” शंकर घोष ने जमीन के हस्तांतरण की जांच की मांग की है। वह मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आयोग के माध्यम से जमीन के हस्तांतरण, लीज और व्यावसायिक उपयोग से जुड़े सभी मामलों की जांच कराने की मांग करेंगे। उन्होंने बताया कि पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में सरकारी चाय बागानों की अनुपयोगी जमीन के 30 प्रतिशत हिस्से को पर्यटन और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति देने के फैसले का उन्होंने और उनकी पार्टी ने कड़ा विरोध किया था।

चाय बागानों के बंगलों में पर्यटकों के ठहरने की व्यवस्था

पर्यटन मंत्री ने चाय बागानों में टी-टूरिज्म को और बढ़ावा देने की योजना की भी जानकारी दी। मंत्री ने कहा, “अगर चाय बागान ही नहीं रहेंगे, तो चाय बागान देखने के लिए लोग आएंगे कैसे?”उन्होंने बताया कि कई चाय बागान मालिकों और कंपनियों के साथ समझौता कर पुराने बंगलों में पर्यटकों के ठहरने की व्यवस्था की जाएगी। पर्यटक इन बंगलों में ठहरकर चाय बागानों की प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव कर सकेंगे। उन्होंने कहा, “चाय बागान क्षेत्र के श्रमिकों और स्थानीय निवासियों को पर्यटन उद्योग से जोड़कर स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की योजना है। स्थानीय लोगों और चाय श्रमिकों को पर्यटन से सीधे लाभ मिले, इस पर जोर दिया जाएगा।” पुराने बंगलों के अलावा चाय बागानों के भीतर होम-स्टे विकसित करने की भी योजना है। राज्य सरकार का लक्ष्य चाय बागानों को केवल चाय उत्पादन के केंद्र के रूप में सीमित न रखते हुए उन्हें पर्यटन के महत्वपूर्ण गंतव्य के रूप में विकसित करना है। हालांकि, शंकर घोष ने यह भी स्पष्ट किया कि पर्यटन को बढ़ावा देने के दौरान चाय बागानों के मूल स्वरूप और चाय उद्योग के हितों को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे।

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