बंगाल

‘आपत्तिजनक नारे पहले ही मिटा देने चाहिए थे, अभी और भी कुछ बाकी’

सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : जादवपुर यूनिवर्सिटी (जेयू) कैंपस की दीवारों पर लिखे ‘राष्ट्र-विरोधी’ नारों को हटाने के सीएम शुभेंदु अधिकारी के कड़े निर्देश के कुछ ही दिनों बाद कैंपस में हलचल तेज हो गई। यूनिवर्सिटी कैंपस की अलग-अलग दीवारों पर लिखे विवादित संदेशों और नारों पर रंग-रोगन कर उन्हें मिटाने का काम शुरू कर दिया गया है। रविवार को सीएम ने कहा कि विवादित नारे पहले ही हटा दिए जाने चाहिए थे। उन्होंने जेयू के चांसलर और रजिस्ट्रार का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित किया था, लेकिन अब जाकर इन नारों को हटाने की कार्रवाई शुरू हुई है। सीएम ने सवाल उठाया कि क्या ऐसे स्लोगन देश के हित में हैं? दीवारों पर लिखे ‘लाल सलाम’ किसके लिए है? उन्होंने सवाल किया कि निर्दोष लोगों की हत्या करने वालों के समर्थन में नारे क्यों? सीएम ने ‘कश्मीर मांगे आजादी’ जैसे नारों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह के नारे क्यों लिखे जाएंगे। सीएम ने स्पष्ट किया कि अभी और भी कुछ मिटाना बाकी है।

कानून सभी के लिए समान है...

तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी के खिलाफ मामले को लेकर पूछे गए सवाल पर सीएम ने कहा कि देश में कानून सभी के लिए समान है। उन्होंने कहा, जो कानून तोड़ेगा या कानून को अपने हाथ में लेगा, उसके खिलाफ कानून अपना काम करेगा। सीएम ने कहा कि कानून किसी को भी नहीं छोड़ेगा—वह मैं भी हो सकता हूं और आप भी।

‘जो रोग है, वही लिखना होगा’

डेंगू के आंकड़ों और बीमारी को दर्ज करने के सवाल पर सीएम ने कहा कि ‘जो रोग है, वही लिखना होगा।’उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार संख्या कम करके दिखाती थी और बीमारी को छिपाने की कोशिश करती थी। सीएम ने कहा कि उनकी सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि अगर डेंगू है तो डेंगू ही लिखा जाए। उन्होंने डॉक्टरों से कहा कि डेंगू लिखने में भयभीत होने का कोई कारण नहीं है। वहीं कुछ जिलों के स्कूलों में पिछले 3-4 महीने से मिड-डे मील के पैसे और रसोइयों के मानदेय में देरी को लेकर पूछे गए सवाल पर सीएम कहा कि तथ्य गलत है। पोर्टल में समस्या थी जिसे अब ठीक कर दिया गया है। चार दिन पहले ही भुगतान कर दिया गया है।

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