सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : मतदान के दिन और परिणाम के दिन के बीच लंबे अंतराल ने कोलकाता को एक बड़े “अड्डा” (गपशप और बहस) के केंद्र में बदल दिया है। 29 अप्रैल को मतदान खत्म होने के बाद और 4 मई को नतीजे आने तक का समय — साथ में लंबा वीकेंड — लोगों के बीच राजनीति पर चर्चा का एक सिलसिला बन गया है। चाय की दुकानों से लेकर घरों, बसों और मेट्रो तक हर जगह एक ही सवाल बार-बार सुनाई दे रहा है: “क्या होगा?”
एमजीरोड के एक चाय स्टॉल पर लोग खुद को जैसे चुनाव विशेषज्ञ मानकर बूथ-स्तर के वोट प्रतिशत पर चर्चा कर रहे हैं। कुछ का मानना है कि इस बार ज्यादा मतदान किसी खास संकेत की ओर इशारा करता है, जबकि दूसरे लोग कहते हैं कि सिर्फ आंकड़ों से नतीजा निकालना आसान नहीं है।
शहर के अलग-अलग हिस्सों — जैसे भवानीपुर और अन्य विधानसभा को लेकर परिवारों और दोस्तों के बीच भी मतभेद साफ दिख रहे हैं। कहीं लोग भ्रष्टाचार और बेरोजगारी पर नाराजगी जता रहे हैं, तो कहीं लोग पिछली सरकारों की तुलना में हुए विकास और कल्याण योजनाओं को अहम बता रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि जो लोग शहर से बाहर काम करते हैं, वे भी वोट डालने या नतीजों का माहौल देखने के लिए लौटे हैं। उनके अनुसार इस बार उत्साह के साथ-साथ एक हल्की चिंता और बेचैनी भी महसूस हो रही है। बसों और ट्रेनों में भी बहस जारी है कई बार तो पूरी सवारी इसमें शामिल हो जाती है। वहीं, व्हाट्सऐप ग्रुप्स पर भी लगातार राजनीतिक चर्चाएं चल रही हैं।
कुल मिलाकर, नतीजों से पहले का यह समय कोलकाता में सिर्फ इंतज़ार नहीं, बल्कि चर्चा, अनुमान और राजनीतिक जागरूकता का एक जीवंत दौर बन गया है।