बाढ़ के बीच बची जान  
बंगाल

कैलाश मानसरोवर नहीं जा सकीं, लेकिन बाढ़ के बीच बची जान

69 वर्षीय पूर्व शिक्षिका बोलीं- ‘अगली बार हेलीकॉप्टर से जाऊंगी’

हुगली : उत्तरपाड़ा की रहने वाली 69 वर्षीय रिटायर्ड शिक्षिका अंजना सान्याल कैलाश मानसरोवर के दर्शन की इच्छा लेकर नेपाल गई थीं। लेकिन भोटेकोशी नदी में ग्लेशियर फटने से आई अचानक बाढ़ ने उनकी यात्रा को खौफनाक अनुभव में बदल दिया।

अंजना का कहना है कि उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे कैलाश पर विराजमान भगवान शिव ने ही उन्हें नई जिंदगी दी हो। 17 सदस्यीय दल 26 अगस्त को काठमांडू से बस के जरिए चीनी इमिग्रेशन कार्यालय की ओर रवाना हुआ था। रास्ते में बस कुछ देर के लिए रुकी। यात्रियों ने चाय पी और फ्रेश हुए।

करीब 10 मिनट बाद बस आगे बढ़ी ही थी कि चालक को अचानक बाढ़ की जानकारी मिली। उसने तुरंत बस मोड़कर काठमांडू की ओर रवाना कर दिया।

‘आंखों के सामने मौत आती दिखी’

अंजना ने बताया कि उस समय आसमान साफ था और तेज धूप थी। अचानक दूर धुएं जैसा गुबार दिखाई दिया और देखते ही देखते नदी का पानी बादल की तरह तेजी से नीचे आता नजर आया। चालक की सतर्कता से उनकी जान बच गई।

उनका कहना है कि अगर बस कुछ मिनट और आगे बढ़ती तो ट्रैफिक जाम में फंस सकती थी और लौटने का रास्ता नहीं मिलता। अंजना ने कहा कि इस बार कैलाश मानसरोवर के दर्शन नहीं हो सके, लेकिन वह हार नहीं मानेंगी। बेटे के सुझाव पर अब वह हेलीकॉप्टर से कैलाश का एरियल टूर करने की योजना बना रही हैं।

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