बंगाल

‘शारदोत्सव’ के नाम पर सियासी संग्राम, सीएम ने वामपंथियों को घेरा

‘शारदोत्सव’ शब्द का इस्तेमाल करने पर माकपा को पुस्तक स्टॉल लगाने की अनुमति न दें

सबिता सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : ‘शारदोत्सव’ शब्द के इस्तेमाल पर अब नई सियासी जंग शुरू हो गयी है। ‘दुर्गापूजा’ की जगह ‘शारदोत्सव’ शब्द के इस्तेमाल पर सीएम शुभेंदु अधिकारी ने वामपंथ के कुछ वर्गों पर ‘सनातन धर्म’ और भगवा रंग को चुनिंदा तरीके से निशाना बनाने का आरोप लगाया। सीएम ने दुर्गापूजा कमिटियों से कहा कि अगर माकपा के पुस्तक स्टॉल में त्योहार का वर्णन ‘दुर्गा पूजा’ के बजाय ‘शारदोत्सव’ के रूप में किया जाता है, तो उन्हें पंडालों के बाहर स्टॉल लगाने की अनुमति न दी जाए। सीएम ने आरोप लगाया कि ऐसा करने से त्योहार के धार्मिक स्वरूप को कमतर किया जा रहा है।

क्या कहा सीएम ने

गुरुवार को विधानसभा में सीएम ने कहा कि उनकी आपत्ति त्योहार के दौरान पुस्तकें बेचने को लेकर नहीं है, बल्कि ‘शारदोत्सव’ शब्द के इस्तेमाल के जरिये दुर्गा पूजा के धार्मिक स्वरूप को नकारने या कमतर दिखाने की कोशिश से है। उन्होंने कहा, ‘‘कुछ प्रोफेसर, जो खुद को वामपंथी कहते हैं, ‘सनातनियों’ के खिलाफ हमला कर रहे हैं। वे चुनिंदा तरीके से भगवा रंग को निशाना बना रहे हैं। मैं सभी दुर्गा पूजा समितियों से कहना चाहूंगा कि अगर वामपंथी अपने लगाए गए पुस्तक स्टॉल पर ‘दुर्गा पूजा’ की जगह ‘शारदोत्सव’ (शरद ऋतु का उत्सव) लिखते हैं, तो ऐसे पुस्तक स्टॉल लगाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि यह सही समय है कि इस धरती पर वामपंथियों द्वारा बोए गए उन बीजों को उखाड़ फेंका जाए, जिसने नक्सलवाद जैसे विचारों को जन्म दिया।

वर्ष 1954 में माकपा से जुड़े ऐसे पहले पुस्तक स्टॉल की स्थापना हुई थी

माकपा और उससे जुड़े संगठन हर साल दुर्गा पूजा पंडालों के पास पुस्तक स्टॉल लगाते हैं, जहां वे वामपंथी साहित्य, पार्टी के प्रकाशन समेत अन्य पुस्तकें बेचते हैं। वे त्योहार के माध्यम से लोगों तक पहुंच बनाने का भी प्रयास करते हैं। वर्ष 1954 में माकपा से जुड़े ऐसे पहले पुस्तक स्टॉल की स्थापना पार्क सर्कस में वरिष्ठ वामपंथी नेता मुजफ्फर अहमद की पहल पर की गई थी। वाम मोर्चे की 2011 में हार के बाद ऐसे लाल कपड़े वाले बुक स्टॉल कम हो गए, हालांकि कुछ चुनिंदा जगहों पर अब भी इनका आयोजन किया जाता है।

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