बंगाल

काेलकाता में ऐतिहासिक मतदान, सारे रिकॉर्ड टूटे

कोलकाता में इस बार मतदान 90% तक पहुंचा, इससे पहले देखा गया है कि कोलकाता में अधिकतम 65% तक मतदान होता था

सबिता, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में कोलकाता ने लोकतंत्र के महापर्व को पूरे उत्साह, उमंग और जोश के साथ मनाया। सुबह से ही शहर के विभिन्न मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गईं। खास बात यह रही कि हल्की बारिश के बावजूद लोगों के उत्साह में कोई कमी नहीं आई। छाते के साथ लोग अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए घरों से निकले, जो उनकी लोकतांत्रिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। दूसरे चरण में कोलकाता उत्तर से लेकर काेलकत्ता दक्षिण तक में खूब वोटिंग हुई। भवानीपुर भले ही चर्चा में रहा मगर कोलकाता की बाकी 10 सीटों पर बंपर वोटिंग हुई। यूं कहें तो मतदान ने इतिहास रच किया। युवा वर्ग से लेकर वृद्ध मतदाता, महिला वोटर्स से लेकर विकलांग मतदाता हर कोई गणतंत्र के इस महापर्व का गवाह बना। एसआईआर के बाद इस मतदान को लेकर हर वोटर्स में ही एक अलग अनुभव की उम्मीद थी। हुआ भी कुछ ऐसा ही। वोटर को मतदान केंद्र तक पहुंचना का अनुभव इस बार कुछ अलग ही रहा। दस्तावेज की चेकिंग से लेकर चुनावी सख्ती साफ देखी गयी।

कोलकाता उत्तर : 89.34 % मतदान (रात 9 बजे तक लगभग)

बेलियाघाटा : 90.74 %

चौरंगी : 86.61 %

इंटाली : 92.01 %

जोड़ासांको : 86.62 %

काशीपुर बेलगछिया : 89.00 %

मानिकतल्ला : 90.27 %

श्यामपुकुर : 88.06 %

कोलकाता दक्षिण : 87.77% मतदान

बालीगंज : 88.02 %

भवानीपुर : 86.65 %

कोलकाता पोर्ट : 89.68 %

रासबिहारी : 86.52 %

पांच साल में यह दिन आता है, बारिश से फर्क नहीं पड़ता...बारिश ने शहर के माहौल को एक अलग ही रंग दे दिया। सुबह जहां मतदाता पूरे उत्साह और जोश के साथ घरों से निकल रहे थे, वहीं बारिश की बूंदों ने इस दिन को और भी यादगार बना दिया। हालांकि, इस बदलते मौसम का असर मतदाताओं के उत्साह पर नहीं पड़ा। लोगों ने कहा कि पांच साल में यह दिन आता है, बारिश या धूप से हमें कोई फर्क नहीं पड़ता है। अगर आंधी तूफान भी आते तो हम पीछे नहीं हटते। वोट देना लोकतंत्र में सबसे बड़ी जिम्मेदारी भी है। 

मौसम का असर मतदाताओं के उत्साह पर नहीं पड़ा

वोट देने के का आनंद

मतदान के बाद शहर के कई इलाकों में सेलिब्रेशन जैसा माहौल देखने को मिला। खासकर भवानीपुर में लोगों का मिजाज अलग ही नजर आया। परिवारों को देखा गया कि वह वोट देने के बाद सीधे चाय कचौड़ी का आनंद लेते हुए नजर आये। परिवारों को मतदान करने के बाद एक साथ समय बिताते हुए देखा गया। महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। कई महिलाओं ने बताया कि वे सुबह जल्दी उठकर घर के सभी काम निपटाने के बाद मतदान केंद्र पहुंचीं। यह न केवल उनकी जिम्मेदारी को दर्शाता है, बल्कि उनके लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति जागरूकता को भी उजागर करता है।

अपनी छोटी से बच्ची के साथ वोट देने पहुंची एक महिला

चुनाव आयोग की व्यवस्थाएं चर्चा में : इस बार चुनाव आयोग द्वारा की गई सख्ती और व्यवस्थाएं भी चर्चा का विषय रहीं। मतदान केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये गये थे। मतदाताओं के दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही थी और हर चरण को सुव्यवस्थित तरीके से पूरा किया गया। कई मतदाताओं ने इस बेहतर व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि इस बार उन्हें मतदान करने का अनुभव पहले से अधिक सुगम और सुरक्षित लगा। एक मतदाता एकता हेला ने कहा कि इस बार व्यवस्थाएं अच्छी थी।

बंपर वोटिंग पर कई कयास

राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज हो गयी है कि आखिर इस बंपर वोटिंग के मायने क्या है। क्या यह सिर्फ एसआईआर के बाद का कदम है या फिर इसके कुछ और मायने है। यहां बता दें कि कोलकाता की 11 सीटों पर ही 2021 में तृणमूल ने जीत हासिल की। इस बार कोलकाता की जनता ने किसे अपनाया और किसे नकारा, यह तो 4 मई को नतीजा आने के बाद ही पता चल पायेगा।

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