बंगाल

व्यावहारिक पत्रों में वंदे मातरम लिखेंगे राज्यपाल

सबिता, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : राज्यपाल डॉ. सी वी आनंद बोस ने एक अहम निर्णय लिया है। अब वे अपने व्यावहारिक पत्रों में हस्ताक्षर के अंत में सादर या भवदीय शब्दों के स्थान पर वंदे मातरम लिखेंगे। राजभवन से मिली जानकारी के मुताबिक राज्यपाल ने ऋषि बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की प्रतिष्ठित रचना वंदे मातरम के सम्मान के प्रतीक के रूप में यह फैसला लिया है। इससे पहले भी राज्यपाल ने वंदे मातरम को लेकर कई अहम कदम उठाये हैं। उन्होंने लोगों से भी इस रचना के सम्मान में किसी भी संभव तरीके से अपने जीवन और दैनिक गतिविधियों में वंदे मातरम को शामिल करने और आत्मसात करने का आग्रह किया है।

राज्यपाल ने की है कई पहल

ऋषि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित प्रतिष्ठित वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में राज्यपाल ने कई पहल की है। पश्चिम बंगाल विधानसभा की ओर जाने वाले लोकभवन के दक्षिण-पश्चिम द्वार का नाम बदलकर वंदे मातरम द्वार रखने का निर्णय लिया। एक वर्ष तक चलने वाले उत्सव की घोषणा की है। उत्सव का शुभारंभ 10 नवंबर को राज्यपाल के नेतृत्व में निकाली गई वंदे मातरम यात्रा के साथ हुआ, जिसमें छात्रों, शिक्षकों और समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। राज्यपाल ने लोकभवन में वंदे मातरम चेयर की स्थापना की है, जिसका उद्देश्य वंदे मातरम के व्यापक प्रभाव और प्रासंगिकता पर शोध करना,कार्यशालाओं एवं सेमिनारों का आयोजन करना है।

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