बिना सूचना के दौरे और बातचीत पर राज्य सरकार नाराज
दार्जिलिंग में राजनीतिक सरगर्मी, फिर से चर्चा में गोरखालैंड
प्रसेनजीत, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : गणतंत्र दिवस से पहले दार्जिलिंग में केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त वार्ताकार (इंटरलोक्यूटर) पंकज कुमार सिंह की सक्रियता को लेकर राज्य सचिवालय नवान्न में तीखी नाराजगी देखी जा रही है। राज्य सरकार का आरोप है कि न तो इंटरलोक्यूटर की नियुक्ति और न ही उनके दार्जिलिंग दौरे की कोई औपचारिक सूचना राज्य को दी गई। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी पंकज कुमार सिंह 23 जनवरी की शाम दार्जिलिंग पहुंचे और अगले दिन यानी शनिवार को उन्होंने बिमल गुरुंग, रोशन गिरी तथा दार्जिलिंग के सांसद राजू बिष्टा से मुलाकात की। इन बैठकों के बाद पहाड़ों में गोरखालैंड समेत विभिन्न मांगों को लेकर एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। राज्य सचिवालय नवान्न के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट कहा कि इंटरलोक्यूटर के दार्जिलिंग आने की जानकारी राज्य सरकार को नहीं दी गई थी। अधिकारी के अनुसार, “यह पूरी प्रक्रिया राज्य सरकार को दरकिनार कर एकतरफा तरीके से आगे बढ़ाई जा रही है, जो संघीय ढांचे की भावना के खिलाफ है।” हालांकि सरकार पूरे मामले पर नजर बनाये हुए हैं। बता दें कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहले ही इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपना चुकी हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दो-दो बार पत्र लिखकर केंद्र की इस पहल को “अवैध, असंवैधानिक और एकतरफा” बताया है। मुख्यमंत्री का आरोप है कि राज्य से किसी प्रकार की सलाह-मशविरा किए बिना ही केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इंटरलोक्यूटर की नियुक्ति कर दी और बाद में उनके कार्यालय के काम शुरू होने की सूचना दी गई। राज्य सरकार का कहना है कि अब इंटरलोक्यूटर स्वयं दार्जिलिंग पहुंचकर विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों से बातचीत कर रहे हैं, जबकि राज्य प्रशासन को इसकी पूर्व जानकारी तक नहीं दी गई। इससे केंद्र और राज्य सरकार के बीच टकराव और गहरा हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम से न केवल पहाड़ों की राजनीति गरमाई है, बल्कि गोरखालैंड मुद्दे पर केंद्र और राज्य के बीच टकराव एक नये चरण में प्रवेश कर चुका है, जिसका असर आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति पर भी पड़ सकता है।