पर्युषण पर्व 
बंगाल

पर्युषण पर्व में नजर आया आध्यात्मिकता, संयम और व्रत चेतना का संगम

आध्यात्मिकता और दिखावा साथ नहीं चल सकते : मुनि जिनेश कुमार

Ravi

हावड़ा : पर्युषण महापर्व के चौथे और पांचवें दिन योगक्षेम विहार के योगक्षेम सभागार में धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। चौथे दिन तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम उत्तर हावड़ा की ओर से “संवाद—धार्मिक एवं सामाजिक विषयों पर” कार्यक्रम मुनि श्री जिनेश कुमार जी ठाणा-3 के सान्निध्य में हुआ।

मुनि श्री जिनेश कुमार ने कहा कि आध्यात्मिकता और दिखावा साथ नहीं चल सकते। युवा पीढ़ी को वास्तविक धर्म और जीवन मूल्यों से जोड़ने के लिए नैतिकता, ईमानदारी, नशामुक्ति और भोजन की शुद्धता को अपनाना जरूरी है। संवाद में सीए विनोद बैद, सीए विनोद कोठारी, सीए रतन दुगड़ और कल्पना बैद ने तकनीक एवं एआई के विवेकपूर्ण उपयोग पर विचार रखे।

पांचवें दिन उत्तर हावड़ा जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा की ओर से ‘व्रत चेतना दिवस’ मनाया गया। मुनि श्री जिनेश कुमार ने कहा कि व्रत असंयम से दूर कर संयम की ओर ले जाते हैं।

भगवान महावीर द्वारा गृहस्थों के लिए बताए गए पांच अणुव्रत, तीन गुणव्रत और चार शिक्षाव्रत का उल्लेख करते हुए उन्होंने पर्युषण को दया, संयम और आत्मशुद्धि का पर्व बताया। मुनि परमानंद ने व्रत को आत्म-अनुशासन का माध्यम बताया, जबकि मुनि कुणाल कुमार ने गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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