अंडाल : दुर्गापुर के मधाईगंज और बर्दवान के आउसग्राम के घने जंगलों में दो ऐसे भेड़िये ( Wolf) देखे गए हैं, जिनके एक-एक पैर कटे हुए हैं। दोनों भेड़ियों के पैर किस परिस्थिति में कटे, यह वन विभाग और वन्यजीव प्रेमियों के लिए कौतूहल का विषय बना हुआ है। वन विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। आशंका जताई जा रही है कि कहीं ये भेड़िये शिकारियों के किसी ट्रैप (जाल) का शिकार तो नहीं हुए।
विंग्स संस्था कर रही है भेड़ियों की गणना
जानकारी के अनुसार, पिछले डेढ़ साल से 'विंग्स' (WINGS) नामक संस्था बर्दवान डिवीजन के आउसग्राम से लेकर दुर्गापुर डिवीजन के बाराबनी तक भेड़ियों की गणना (Wolf Census) का काम कर रही है। संस्था के सचिव अर्कज्योति मुखर्जी ने बताया कि वन विभाग द्वारा जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद उनके 18 सदस्य लगातार भेड़ियों के रहन-सहन और उनकी गतिविधियों पर बारीक नजर रख रहे हैं। सर्वे में सामने आया है कि आउसग्राम से बाराबनी के बीच भेड़ियों के कुल 6 झुंड (Pack) सक्रिय हैं, और प्रत्येक झुंड में 4 से 5 भेड़िये हैं।
गर्भवती है तीन टांग वाली मादा भेड़िया
निगरानी के दौरान टीम ने पाया कि दुर्गापुर-फरीदपुर के मधाईगंज और आउसग्राम के जंगलों में एक-एक भेड़िया ऐसा है, जिनके तीन ही पैर हैं। मधाईगंज: यहाँ स्पॉट की गई भेड़िया 'मादा' है। विशेष बात यह है कि उसने वर्ष 2024 में शावकों को जन्म दिया था और वर्तमान में वह पुनः गर्भवती है।आउसग्राम में देखा गया लंगड़ा भेड़िया 'नर' है।
क्या कहते हैं अधिकारी
दुर्गापुर के डीएफओ (DFO) अनुपम खां ने बताया कि दोनों भेड़ियों के पैर कैसे कटे, इसकी जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि राहत की बात यह है कि दोनों भेड़ियों के पीछे के पैर कटे हैं। भेड़िये अपनी मुख्य ताकत सामने के पैरों से लगाते हैं, इसलिए पीछे का एक पैर न होने के बावजूद वे स्वाभाविक जीवन जी रहे हैं। यदि सामने का पैर कटा होता, तो उनका जीवित रहना मुश्किल हो सकता था। डीएफओ ने स्पष्ट किया कि यदि यह किसी हादसे या आपसी संघर्ष का परिणाम है, तो यह प्राकृतिक है।