मुर्शिदाबाद : मुर्शिदाबाद के शमशेरगंज थाने के जाफराबाद गांव में पिता-पुत्र हरगोबिंद दास और चंदन दास की हत्या के मामले में जज ने 13 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। जंगीपुर सबडिविजन एडीजे-1 कोर्ट के जज अमिताभ मुखर्जी ने सोमवार को 13 लोगों को दोषी ठहराया था, जिन्हें मंगलवार को सजा सुनायी गयी। इस बीच, कोर्ट से निकलकर जेल वैन में बैठते समय सजायाफ्ता अपराधियों ने दावा किया कि वे बेगुनाह हैं। वे इस घटना में शामिल नहीं थे। उन्हें योजनाबद्ध तरीके से फंसाया गया था। उल्लेखनीय है कि इसी साल 12 अप्रैल को शमशेरगंज के जाफराबाद गांव के रहने वाले हरगोबिंद दास और उनके बेटे चंदन दास की वक्फ संशोधन बिल को लेकर हुई हिंसा में हत्या कर दी गई थी। राज्य सरकार ने हत्या की जांच के लिए सिट का गठन किया था। घटना के बाद अभियुक्त दूसरे राज्यों में भाग गए थे। जांच टीम ने हत्या के मामले में राज्य के अलग-अलग हिस्सों के साथ-साथ दूसरे राज्यों से कुल 13 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया था। जज अमिताभ मुखर्जी की कोर्ट में सुनवाई करीब आठ महीने तक चली। मृतक के परिवार समेत कई लोगों की गवाही और सबूतों के आधार पर सोमवार को जंगीपुर कोर्ट में 13 लोगों को दोषी ठहराया गया। वहीं मंगलवार को फैसले और सजा की घोषणा के लिए कोर्ट परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। जज ने बीएनएस की धारा 103, 2, 301/2, 331/5, 191/3, 115/2, 126/2, 332/A और 3(5) के तहत सभी को दोषी ठहराया। राज्य सरकार की तरफ से नियुक्त वकील बिभास चक्रवर्ती ने कहा कि इन दोनों धाराओं के तहत ज्यादा से ज्यादा मौत की सजा हो सकती थी लेकिन जज ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई। राज्य सरकार से बातचीत के बाद भविष्य में हाई कोर्ट जाने का फैसला लिया जा सकता है।
इन्हें मिली है सजा
असामूल नादाब, दिलदार नादाब, इंजामूल हक, जियाउल हक, शेख फेकारूल, शेख अजफारुल, शेख मोनिरूल, शेख इकबाल, नुरूल हसन, सबा करीम,हजरत अली,शेख एकबार, शेख यूसुफ
एडीजी साउथ बंगाल ने कहा
इस संबंध में एडीजी साउथ बंगाल सुप्रतिम सरकार ने बताया कि इस घटना के बाद डीआईजी (मुर्शिदाबाद रेंज) सैयद वकार राजमी की अगुवाई में सिट का गठन किया गया था। इस टीम ने जांच के दौरान एफआईआर में नामजद 5 अभियुक्तों के अलावा और 8 अभियुक्तों की पहचान की। इन अभियुक्तों को अलग-अलग राज्यों से गिरफ्तार किया गया। जांच अधिकारी ने 56 दिनों के दौरान जांच पूरा कर अदालत में चार्जशीट जमा किया गया था। जांच में सीसीटीवी फुटेज की जांच से विशेष मदद मिली। इसके अलावा गिरफ्तार अभियुक्तों के मोबाइल लोकेशन टावर को भी चिन्हित किया गया था। साथ ही गैट पैटर्न एनालिसिस के साथ फॉरेंसिक जांच की भी सहायता ली गयी थी। अभियुक्तों की निशानदेही पर बरामद हथियार पर लगे रक्त का डीएनए टेस्ट भी कराया गया था। इस मामले में मॉब्लिंचिंग की धारा जोड़ी गयी थी।