सन्मार्ग संवाददाता
बर्नपुर : कई दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण दामोदर नदी का जलस्तर बढ़ने से तेज बहाव के कारण दैनिक यात्रियों के आने-जाने का एकमात्र सहारा कुकड़ाकुड़ी घाट का अंतिम पुल भी दानोदर नदी में समा गया। गौरतलब है कि पहले तो दो अस्थायी बांस के पुल केशरकुड़ी और ईश्वरदा घाट बह गये थे, वहीं अब तीसरा और अंतिम पुल भी तेज धारा में बह गया, जिससे दैनिक यात्री काफी प्रभावित हुए हैं। स्थानीय लोगों एवं दैनिक यात्रियों का कहना है कि तीनों पुलों के बह जाने से बर्नपुर शहर का बांकुड़ा और पुरुलिया से सीधा संपर्क पूरी तरह टूट गया है। इससे प्रतिदिन इन पुलों से होकर आने-जाने वाले हजारों यात्रियों, मजदूरों और छात्रों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही आने-जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। एक यात्री ने बताया कि अब नाव का सहारा लेकर आना-जाना पड़ रहा है। इससे बाइक को नाव पर चढ़ाने एवं उतारने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वैकल्पिक मार्ग से जाने में काफी अधिक समय लगता है, इसलिए लोग मजबूरी में अपनी जान जोखिम में डालकर नाव का सहारा लेने को विवश हैं।
तीनों घाट की ढलाई करने की मांग
दामोदर - बिहारीनाथ सेतु बंधन कमेटी के महासचिव चंदन मिश्रा ने कहा कि केशरकुड़ी, ईश्वरदा और कुकड़ाकुड़ी घाट के तीनों स्थायी बांस के पुल बहने से हजारों लोग प्रभावित हुये हैं। सालतोड़ा पंचायत, सालतोड़ा कॉलेज और गैस प्लांट में काम करने वाला ज्यादातर कर्मचारी बर्नपुर के हैं, जो अपनी जान जोखिम में डालकर हर दिन नाव का सहारा लेकर नदी पार करते हैं। वहीं मछली विक्रेता एवं सब्जी वालों को सामान लेकर आने-जाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, कारण नाव पर जब तक पूरी सवारी नहीं भरती है, तो नाव शुरू नहीं होता है और वह समय से अपने स्थान पर नहीं पहुंच पाते हैं। साथ ही कहा कि तीनों फेरी घाट पर नाव से उतरने के समय महिलाओं को कूदना पड़ता है, जिससे मिट्टी गिली होने से फिसल कर गिरने की संभावना बहुत ज्यादा रहती है। कमेटी की तरफ से शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल से मांग की गई है कि तीनों घाटों को दोनों तरफ नाव ठहराव के स्थान की पक्की ढलाई की जाये।