आसनसोल

नकली होम्योपैथिक दवाओं के खिलाफ मुखर हुआ एसोसिएशन

होम्योपैथी में केमिस्ट या ड्रगिस्ट के लिए कॉलेज का बताया अभाव

बर्दवान : राज्य में नकली होम्योपैथिक दवाओं की बाढ़ आ गयी है इसके बावजूद जांच एजेंसियां पूरी तरह से उदासीन बनी हुई हैं। कुछ ऐसा ही आरोप बंगाल होम्योपैथिक केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने लगाया है। इसी के साथ केंद्र सरकार के 'शेड्यूल-के' (Schedule-K) को लेकर भी काफी भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। 'बंगाल होम्योपैथिक केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन' का दावा है कि बाजार में होम्योपैथी के नाम पर कई ऐसी दवाएं बेची जा रही हैं जो वास्तव में होम्योपैथिक दवाएं हैं ही नहीं। रविवार को बर्दवान के साइंस सेंटर में संगठन का 15वां राज्य सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। इससे पहले शनिवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में संगठन के राज्य समिति के सदस्यों ने इन मुद्दों पर अपनी नाराजगी जाहिर की। संस्था के राज्य अध्यक्ष दीपक पाल और महासचिव अनिमेष बंद्योपाध्याय ने कहा कि बंगाल को होम्योपैथी का केंद्र माना जाता है, लेकिन आज तक राज्य में केमिस्ट या ड्रगिस्ट के लिए कोई विशेष फार्मेसी, डिप्लोमा या डिग्री कॉलेज नहीं बनाया गया। सरकारी होम्योपैथिक कॉलेजों में केवल डॉक्टर तैयार करने के लिए सर्टिफिकेट कोर्स कराए जाते हैं। पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि वर्तमान में होम्योपैथिक डॉक्टर खुद ही पर्चे लिख रहे हैं और खुद ही दवाएं दे रहे हैं। एलोपैथी में ऐसा नहीं होता, तो होम्योपैथी में यह नियम विरुद्ध काम क्यों हो रहा है? उन्होंने इसे गैरकानूनी बताया। डॉक्टरों द्वारा सीधे दवा देने से मरीज अंधेरे में रहते हैं। उन्हें न तो दवा का नाम पता चलता है और न ही उसकी असली कीमत। यह मरीजों के साथ एक तरह की धोखाधड़ी है। वहीं केंद्र सरकार के नए कानून के अनुसार, अब एलोपैथिक दवाओं की दुकानों में भी अलग अलमारी में होम्योपैथिक दवाएं रखी जा सकेंगी। इससे मूल होम्योपैथिक दवा विक्रेताओं के सामने गहरा संकट खड़ा हो गया है। एसोसिएशन के सदस्यों समर साधुखां, विश्ववरण चक्रवर्ती, असीम भौमिक आदि ने बताया कि राज्य सम्मेलन में बंगाल के 23 जिलों के प्रतिनिधि इन विषयों पर चर्चा करेंगे। इसके बाद, आम जनता को जागरूक करने और सरकार की उदासीनता के खिलाफ पूरे राज्य में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।

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