आसनसोल

धोखाधड़ी कर लाखों की ठगी करने वाले अभियुक्तों को पुलिस रिमांड

आसनसोल : आसनसोल दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट की साइबर क्राइम थाना तथा डीडी (डिटेक्टिव डिपार्टमेंट) के संयुक्त तत्वावधान में आसनसोल के एक नंबर मोहिशिला कॉलोनी इलाके में छापामारी अभियान चलाकर 2 लाख 6 हजार 634 रूपये की ठगी करने से संबंधित मामले में 3 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार होने वाले अभियुक्तों में धनबाद के मुन्ना कुमार मंडल, गिरिडीह के उमेश मंडल तथा देवघर के दिलीप मंडल शामिल हैं। वहीं तलाशी के दौरान पुलिस ने उनके पास से 4 मोबाइल फोन समेत 3 हजार रुपये जब्त किये हैं। उन्हें मंगलवार को आसनसोल जिला अदालत के सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया। मामले के जांच अधिकारी ने उक्त ठगी किये गए पैसों की बरामदगी, कांड में शामिल अन्य अभियुक्तों की गिरफ्तारी समेत मामले पर अपनी विशेष छानबीन करने का हवाला देते हुए उन्हें पुलिस रिमांड पर लेने की अपील अदालत से की। अदालत ने अभियुक्तों की जमानत अर्जी रद्दकर उन्हें 3 दिनों की रिमांड पर पुलिस के साथ भेज दिया।

क्या था पूरा मामला ?

बीते 22 जनवरी को प्रतिबिंब पोर्टल की नियमित जांच के दौरान यह पाया गया था कि एनआरसीपी पोर्टल के माध्यम से एक मोबाइल नंबर से 2 लाख 6 हजार 634 रुपये ठगी की एक शिकायत दर्ज की गई थी, जिसका पता एक नंबर मोहिशिला कॉलोनी में था। उसके बाद पुलिस की टीम घटनास्थल पर पहुंची, तभी पता चला कि कुछ समय से ये तीनों लोग उसी इलाके में एक किराए के मकान में रह रहे हैं। वहीं पुलिस के अधिकारियों के पूछने पर सभी घबरा गए और अलग-अलग समय पर अलग-अलग बातें बताने लगे, जो तीनों के बयानों से बिल्कुल अलग थी। हालांकि जब उनसे मोबाइल दिखाने को कहा गया तब अभियुक्तों ने कहा कि वे मोबाइल फोन का इस्तेमाल ही नहीं करते है। इससे पुलिस का शक और बढ़ गया। उनसे दोबारा पूछा की गयी लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। फिर उनमें से एक अभियुक्त रो पड़ा और उसने वह जगह दिखाई जहां उन्होंने अपने मोबाइल फोन छिपा रखा था। पूछताछ के दौरान धीरे-धीरे उन्होंने खुलासा करना शुरू कर दिया कि वे वास्तव में साइबर धोखाधड़ी गिरोह में शामिल हैं और कुछ समय पहले से आसनसोल में ही रह रहे हैं और यहीं से वे धोखाधड़ी का काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि वे पीड़ितों के मोबाइल फोन पर उन्हें व्हाट्सएप पर एक एपीके फाइल भेजते हैं, जो उन्हें गिरोह के अन्य सदस्यों से मिलती थी। वे झूठे वादे करके पीड़ितों को एपीके फाइल डाउनलोड करने के लिए फुसलाते थे तथा उनके फोन पर अपना कब्जा कर लेते थे। फिर वे पीड़ित के मोबाइल फोन को अपने फोन की तरह इस्तेमाल करते थे तथा पीड़ितों के पैसे अपने गुप्त खातों में ट्रांसफर कर देते थे। हालांकि देश के अलग-अलग हिस्सों में बैठे गिरोह के अन्य सदस्य फिर उस पैसे को निकाल लेते थे। इसके बाद पुलिस ने गिरफ्तार व्यक्तियों से फिर से पूछताछ शुरू की और लंबी पूछताछ के बाद उन्होंने कबूल किया कि वे साइबर धोखाधड़ी मामले में गहराई से शामिल हैं। इस साइबर अपराध के पीछे एक बड़ा गिरोह है और वर्तमान में गिरफ्तार व्यक्ति उस गिरोह के महत्वपूर्ण सदस्य हैं। आगे की पूछताछ में उन्होंने अपने गिरोह के सदस्यों के भी नाम बताए, जिनमें झारखंड के कुछ लोग शामिल हैं।

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