मुर्ति बनातीं अनिमा मार्जित 
आसनसोल

अनिमा मार्जित की बनायीं मिट्टी की मूर्तियां लगती हैं सजीव

पति के शैय्याशायी होने के बाद संभाला परिवार की जिम्मेदारी

Vijay Shankar

मुर्शिदाबाद : मुर्शिदाबाद के नौदा के अमतला की महिला मूर्तिकार कलाकार अनिमा मार्जित अब किसी परिचय की मोहताज नहीं रह गई हैं। उनकी बनायीं प्रतिमाओं की चर्चा राज्य भर में होने लगी है। वहीं उनके पति कई सालों से बीमार चल रहे हैं। कहा जाये तो लगभग शैय्यासायी हो गए हैं। वह किसी भी तरह का काम नहीं कर सकते। इसलिए अनिमा ने परिवार का जिम्मा अपने कंधों पर ले लिया है। बेटे को खोने का गम भी सीने में लिए और परिवार को संभालते हुए वे रात के अंधेरे में मूर्तियां गढ़ती हैं। अनिमा मार्जित के कुशल हाथों के स्पर्श से मिट्टी की प्रतिमा सजीव बन जाती है। हालांकि, पिछले कुछ सालों से अनिमा मार्जित को मूर्तियां बनाने में उनकी बेटी भी मदद कर रही हैं। इस साल, वे 9 बड़ी मूर्तियां बना रही हैं। वह घर के रोज़ाना के कामों और अपने पति की देखभाल से मिलने वाले खाली समय में मूर्तियां बनाती हैं। हालांकि, वह खास तौर पर रात के अंधेरे में अपने खाली समय में मूर्तियां बनाती हैं। अनिमा मार्जित के पिता भी एक मूर्ति कलाकार थे। अपने पिता के मार्गदर्शन में अनिमा मार्जित एक कुशल मूर्ति कलाकार बन गईं। अनिमा देवी ने कहा, शादी के बाद, मेरे ससुराल वालों ने मेरे मूर्ति बनाने के काम पर एतराज़ किया था। उनकी मनाही के बावजूद, मैं देर रात तक जागती और अपने पति और ससुराल वालों की नज़रों से बचकर अलग-अलग देवी-देवताओं की मूर्तियां बनाती। अब, जब लोग मेरे काम की तारीफ़ करते हैं, तो मुझे बहुत खुशी होती है।

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