आसनसोल

दुर्गापुर में खुलेगा सेमीकंडक्टर प्लांट

उद्योग के लिए 5 हजार करोड़ रुपये का निवेश पैकेज

दुर्गापुर : पश्चिम बंगाल की पहली भाजपा सरकार ने अपने पहले बजट में राज्य के औद्योगिक और आर्थिक पुनरुद्धार के लिए एक बड़ा रोडमैप पेश किया है। सरकार ने औद्योगिक विकास को रफ्तार देने के लिए उद्योग, वाणिज्य और उद्यम विभाग के लिए कुल 1,483.97 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जिसके साथ ही 5,000 करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश प्रोत्साहन पैकेज की भी घोषणा की गई है। इस प्रोत्साहन पैकेज का मुख्य उद्देश्य राज्य में उद्योगों के लिए वित्तीय इंसेंटिव्स को दोबारा शुरू करना है, जिसमें रोजगार पैदा करने वाले उद्योगों को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। बामुनारा एंड अंगदपुर इंडस्ट्रियल वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने भी इस बजटीय रोड मैप की सराहना की है। राज्य में उद्योगों के लिए जमीन की उपलब्धता को आसान बनाने के उद्देश्य से सरकार ने एक नई औद्योगिक नीति लाने की प्रतिबद्धता जताई है। इसके तहत भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को पूरी तरह बाधारहित और सुगम बनाया जाएगा, जिसके लिए अर्बन लैंड सीलिंग एक्ट (शहरी भूमि सीलिंग कानून) की समीक्षा भी की जाएगी ताकि निजी उद्योगों की स्थापना आसानी से हो सके। इसके अलावा सार्वजनिक उद्यमों और औद्योगिक पुनर्निर्माण के लिए 73.45 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिससे बीमार और बंद पड़े उद्योगों को नया जीवन दिया जाएगा। पूंजी बाजारों को मजबूत करने के लिए कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज (CSE) को पुनर्जीवित करने के लिए भी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

आसनसोल, दुर्गापुर व सिलीगुड़ी में मेट्रो रेल की घोषणा

बजट में क्षेत्रीय और सेक्टोरल विकास पर विशेष जोर देते हुए औद्योगिक गलियारे आसनसोल और दुर्गापुर के साथ सिलीगुड़ी में भी मेट्रो रेल नेटवर्क के विस्तार की घोषणा की गई है। इसके साथ ही दुर्गापुर में एक अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर यूनिट स्थापित करने का एक बड़ा प्रस्ताव रखा गया है, जो राज्य को तकनीकी क्षेत्र में आगे ले जाएगा। उत्तर बंगाल के चाय बागानों को राहत देते हुए कमर्शियल टी एस्टेट के लिए आवश्यक न्यूनतम भूमि की सीमा को 30 एकड़ से घटाकर 15 एकड़ कर दिया गया है। पूर्व मिदनापुर के दादनपात्रबाड़ में एक गहरे समुद्री बंदरगाह (डीप-सी पोर्ट) के निर्माण को भी गति दी जाएगी। वहीं व्यापार को सुगम बनाने (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) की दिशा में सरकार ने एक क्रांतिकारी नीतिगत बदलाव की घोषणा की है। अब 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक मूल्य की औद्योगिक परियोजनाओं को स्थानीय नागरिक निकायों और नगर पालिकाओं से ट्रेड लाइसेंस, बिल्डिंग प्लान की मंजूरी या अन्य संबंधित क्लीयरेंस लेने की कोई आवश्यकता नहीं होगी। इस ऐतिहासिक कदम से लालफीताशाही पूरी तरह समाप्त होगी और राज्य में बड़े निवेश को आकर्षित करने में मदद मिलेगी।

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