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पूर्व बर्दवान के एक प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में छात्रों के नामांकन पर रोक लगाने का निर्देश

बर्दवान के एक प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में छात्रों के दाखिले पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं।

Gopal Kumar Singh

सन्मार्ग संवाददाता

बर्दवान : ​इस बात की आशंका पहले से ही जताई जा रही थी। बिना किसी अपने अस्पताल या बुनियादी ढांचे के कोई भी मेडिकल कॉलेज चलाना संभव नहीं है। शुरुआत में बर्दवान शहर के उल्लास इलाके के एक निजी अस्पताल के साथ अनुबंध करके इस मेडिकल कॉलेज को शुरू किया गया था। अब इस कॉलेज में छात्रों के दाखिले को रोकने का निर्देश स्वास्थ्य मंत्री ने जारी किया है। स्वास्थ्य भवन से जारी इस निर्देश के बारे में स्वास्थ्य मंत्री शारद्वत मुखर्जी ने कहा, ‘मेरे पास पहले ही शिकायत आई थी। मैंने खुद जाकर उस प्राइवेट मेडिकल कॉलेज का दौरा किया। जिस अस्पताल के साथ इनका टाई-अप था, उन्होंने मुझे ईमेल करके बता दिया है कि उनका उस प्राइवेट मेडिकल कॉलेज से अब कोई संबंध नहीं है। किराए के अस्पताल के भरोसे कोई मेडिकल कॉलेज नहीं चल सकता। इसलिए फिलहाल हमने उन्हें किसी भी तरह का छात्र दाखिला न करने का निर्देश भेजा है।’ ​जब इस निजी कॉलेज के प्रधानाचार्य (प्रिंसिपल) अमिताभ पाल से इस बारे में जानकारी लेने के लिए फोन किया गया, तो उन्होंने कहा, ‘मैंने इस बारे में सुना है। अभी व्यस्त हूं, बाद में बात करता हूं।’ इसके बाद उन्हें बार-बार फोन किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। वहीं, संस्था के सीईओ सुभाष चंद्र नस्कर ने कहा, ‘हमारे पास इस संबंध में कोई नोटिफिकेशन या ईमेल नहीं आया है। इसलिए हम कुछ नहीं कह सकते। और अगर स्वास्थ्य मंत्री ने खुद कुछ कहा है, तो उस पर टिप्पणी करना हमारे लिए उचित नहीं होगा।’

विद्यार्थियों ने कहा

तालित इलाके के इस प्राइवेट मेडिकल कॉलेज के कुछ छात्रों से बात करने पर पता चला कि इस निर्देश की खबर सुनने के बाद वे भी अपनी पढ़ाई को लेकर बेहद चिंतित हैं कि अगर अस्पताल ही नहीं रहेगा, तो क्या होगा। नाम न छापने की शर्त पर एक छात्र ने बताया, ‘हमें अगस्त के पहले हफ्ते में आखिरी बार उल्लास इलाके के उस निजी अस्पताल में ले जाया गया था। उसके बाद से हम कहीं नहीं गए हैं। अब इस स्थिति में हमें समझ नहीं आ रहा कि क्या करें। मैंने घर पर पिताजी को बता दिया है।’

कैसे पकड़ा गया पूरा मामला

23 अगस्त को बर्दवान आकर शिकायत मिलने पर स्वास्थ्य मंत्री शारद्वत मुखर्जी ने इस कॉलेज का निरीक्षण किया था। उसी दिन उन्होंने मेडिकल कॉलेज के बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) पर सवाल उठाए थे। ​बाद में एक बच्चे की मौत की घटना के बाद यह बात सामने आई कि शेख सायदुल हक इसी मेडिकल कॉलेज में ''सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर'' के तौर पर कार्यरत थे। फर्जी डॉक्टर के रूप में पकड़े जाने पर इस मेडिकल कॉलेज अस्पताल के प्रधानाचार्य अमिताभ पाल ने कहा था, ‘हमारे यहां सायदुल हक सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर के रूप में थे। हमारे यहां से छात्र-छात्राएं जब केआईएमएस (KIMS) अस्पताल जाते थे, तब वे भी वहां जाते थे। उस अस्पताल के साथ हमारा टाई-अप था। बाद में उनके पीछे हटने से अब थोड़ी परेशानी हो रही है। हम नवाबहाट इलाके के एक और निजी अस्पताल से बात कर रहे हैं। हम छात्रों को वहां ले जाने के बारे में सोच रहे हैं। बातचीत चल रही है, फाइनल होते ही काम शुरू हो जाएगा।’ ​वहीं, स्वास्थ्य मंत्री के इस निर्देश के बाद अब कॉलेज में पढ़ रहे छात्र-छात्राओं का भविष्य स्वाभाविक रूप से सवालों के घेरे में आ गया है।

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