रानीगंज : प्राचीन शहर रानीगंज के सामाजिक, व्यावसायिक, आर्थिक एवं भौगोलिक अस्तित्व को बचाने के लिए तैयार हुयी रानीगंज बचाओ मंच की पहली स्टेयरिंग कमेटी की बैठक हुयी। रविवार की शाम आईएमए हाॅल में क्त बैठक में कमेटी के सदस्यों ने आने वाले दिनों में आंदोलन की रूप-रेखा तय की। बैठक का नेतृत्व रानीगंज बचाओ मंच के ज्वाइंट कन्वेनर एवं रानीगंज नगर पालिका के पूर्व चेयरमैन गौतम घटक ने की। बैठक में सदस्यों ने कहा कि रानीगंज के अस्तित्व को बचाने के लिए केवल आंदोलन ही नहीं, साथ में कानूनी लड़ाई भी लड़नी होगी। इसके लिए लीगल टीम को मजबूत करने पर जोर दिया गया। कहा गया कि 28 नवंबर को शहर के नेताजी स्टैच्यू के समक्ष स्ट्रीट काॅर्नर किया जाएगा, जिसमें सभी गैर-राजनीतिक संगठनों को शामिल होने का आह्वान रानीगंज बचाओ मंच द्वारा किया गया। बैठक में कहा कि एक ओर जहां केन्द्र सरकार का कोयला मंत्रालय रानीगंज के चारों ओपेन कास्ट माइंस बनाने की योजना की ओर बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ राज्य सरकार की इकाई एडीडीए ने रानीगंज में किसी भी निर्माण कार्य पर 300 मीटर की पाबंदी लाकर शहर के विकास कार्य पर एक तरह से विराम लगा दिया है।
डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य ने कहा
बैठक में डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य ने कहा कि सरकार बड़ी सुनियोजित तरीके से रानीगंज का वेल्यूएशन कम कर रही है ताकि जब मुआवजा देने की बात आए तो वर्तमान वेल्यूएशन से ही मुआवजा दे। इसलिए उनलोगों को पहले से ही अपना वेल्यूएशन लीगल तरीके से कराकर रखना होगा। उन्होंने और एक महत्वपूर्ण बात उजागर की कि सरकार यदि जनता के विकास के लिए कोई कार्य करती है तो वह किसी भी जमीन को आसानी से अधिकृत कर सकती है, किन्तु व्यवसाय के लिए नहीं। ऐसी अवस्था में उनलोगों को रानीगंज शहर के व्यवसायिक अस्तित्व, रोजगार के स्रोत एवं रानीगंज शहर से दिए जा रहे सरकारी टैक्स के आंकड़ों को भी इकट्ठा कर एक लीगल डक्यूमेंट बनाने की जरूरत है।
चेंबर अध्यक्ष ने कहा
इस बैठक में लोगों को संबंधित करते हुए रानीगंज चेम्बर ऑफ काॅमर्स के अध्यक्ष रोहित खेतान ने कहा कि चेम्बर यह लड़ाई बहुत पहले से ही लड़ रहा है। इसके लिए एक कमेटी भी रानीगंज चेम्बर ऑफ काॅमर्स ने बना रखी है। वे लोग रानीगंज की दो प्रमुख समस्यायों को लेकर जिला प्रशासन से लेकर सत्तारुढ़ तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के पास चक्कर लगा चुके हैं। मंत्री मलय घटक, विधायक नरेन्द्रनाथ चक्रवर्ती, सांसद शत्रुघ्न सिन्हा, एडीडीए के चेयरमैन कवि दत्त से भी कई बार बैठकें हुई हैं कि रानीगंज में 300 मीटर की जो पाबंदी लगी है, उस पर पुनर्विचार किया जाए। सभी ने इस विषय को लेकर राज्य के शहरी विकास मंत्री फिरहाद हकीम को पत्र भी लिखा है और रानीगंज की इस समस्या को प्रमुखता से देखने एवं पुनर्विचार करने का आह्वान किया है। रोहित खेतान ने कहा कि उन्हें मूलत: दो लड़ाई लड़नी है। एक रानीगंज के चारों तरफ ओपेन कास्ट माइंस अर्थात ओसीपी के खिलाफ और दूसरी धंसान प्रभावित क्षेत्रों से 300 मीटर की दूरी पर लगे निर्माण कार्य पर पाबंदी के खिलाफ।