पथवारोध करते ग्रामीण 
आसनसोल

निजी रास्ता छोड़कर गांव की सड़क से दौड़ा रहे थे कोयले की डंपर

ग्रामीणों ने लगाया जाम

Sanjay Singh

पांडवेश्वर: जर्जर हो चुकी सड़क, दिन-रात उड़ती धूल का गुबार और आंखों के सामने तेज रफ्तार से दौड़ते मौत बनकर गुजरते कोयले के भारी डंपर। पांडवेश्वर के श्यामसुंदरपुर इलाके के ग्रामीणों के सब्र का प्याला आखिरकार शनिवार को छलक गया। ECL के भारी वाहनों की मनमानी के खिलाफ आदिवासी पाड़ा के लोगों ने लामबंद होकर सड़क जाम कर दी और जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के चलते घंटों तक इस रूट पर वाहनों के पहिए थमे रहे।

आरोप- अपनी सड़क होते हुए भी गांव से निकाल रहे थे गाड़ियां

प्रदर्शनकारी ग्रामीणों का कहना था कि ECL के पास कोयले की ढुलाई के लिए अपनी निजी सड़क मौजूद है। इसके बावजूद कंपनी के भारी डंपर घनी आबादी वाले ग्रामीण क्षेत्र और जिला परिषद की सड़क से निकाले जा रहे हैं। भारी डंपरों के लगातार दबाव से जिला परिषद की पक्की सड़क गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। डंपरों से उड़ने वाली काली धूल घरों के भीतर तक पहुंच रही है, जिससे बुजुर्गों और बच्चों में सांस की बीमारियां बढ़ रही हैं। सड़क पर तेज रफ्तार कोयला गाड़ियों की वजह से पैदल और साइकिल से स्कूल जाने वाले बच्चों की जान हमेशा जोखिम में रहती है।

अधिकारी मौके पर पहुंचे, दिया डायवर्जन का भरोसा

सड़क जाम की सूचना मिलते ही ECL के अधिकारी मधुसूदन सिंह दलबल के साथ मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से बातचीत की।

मधुसूदन सिंह ने कहा, 'मूसलाधार बारिश के चलते कंपनी की मुख्य निजी सड़क बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी। इसी मजबूरी में अस्थाई तौर पर वाहनों को इस रूट से निकाला जा रहा था। ग्रामीणों की परेशानी जायज है। शनिवार दोपहर से ही इस रास्ते से कोयले की ढुलाई पूरी तरह बंद की जा रही है और सभी डंपरों को वैकल्पिक मार्ग पर डायवर्ट कर दिया गया है।' कंपनी की ओर से मिले इस ठोस आश्वासन और तत्काल प्रभाव से रूट बदलने के आदेश के बाद ग्रामीणों ने सड़क से जाम हटाया और यातायात सामान्य हो सका। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि दोबारा इस सड़क से भारी वाहन गुजरे, तो बिना किसी पूर्व सूचना के अनिश्चितकालीन चक्का जाम किया जाएगा।

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